रबी की फसलों में खरपतवार नियंत्रण समय पर करना जरूरी है। खरपतवार फसल के साथ पानी, पोषक तत्व, धूप और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। अधिक खरपतवार होने पर फसल की बढ़वार और उपज प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसानों को बुवाई के बाद से ही खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए।
शुरुआती अवस्था में क्या करें?
गेहूं, चना, मटर और सरसों में खरपतवारों की किस्म और उनका फैलाव खेत के अनुसार अलग हो सकता है। किसान नियमित निरीक्षण करके खरपतवार की पहचान करें और फसल की अवस्था के अनुसार नियंत्रण का तरीका चुनें।
निराई-गुड़ाई: जहां संभव हो, खुरपी या व्हील हो की मदद से खरपतवार निकालें।
समय पर नियंत्रण: खरपतवारों को अधिक फैलने से पहले नियंत्रित करने की योजना बनाएं।
फसल के अनुसार उपाय: गेहूं, चना और सरसों के लिए एक ही विधि को समान रूप से लागू न करें।
एकीकृत प्रबंधन: जरूरत के अनुसार यांत्रिक, कृषि संबंधी और रासायनिक उपायों का उचित संयोजन अपनाएं।
खरपतवारनाशी इस्तेमाल करते समय सावधानी
खरपतवारनाशी चुनने से पहले जांचें कि उत्पाद संबंधित फसल और खरपतवार के लिए पंजीकृत तथा अनुशंसित है। उसकी मात्रा, छिड़काव का समय और सुरक्षा निर्देश लेबल के अनुसार रखें। बिना विशेषज्ञ सलाह के अलग-अलग दवाओं को मिलाकर छिड़काव न करें। संदेह होने पर कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।
निष्कर्ष: नियमित निगरानी, समय पर निराई-गुड़ाई और फसल के अनुसार सही नियंत्रण अपनाने से खरपतवार की समस्या कम करने और फसल की बढ़वार सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।



