उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए समय पर भुगतान, उचित मूल्य और तौल में पारदर्शिता महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को गन्ना किसानों और चीनी क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की। इसकी अध्यक्षता नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद करेंगे।
केंद्र सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, समिति गन्ने के लाभकारी मूल्य, खेती की लागत, चीनी के एक्स-मिल न्यूनतम बिक्री मूल्य, गन्ने की रिकवरी की जाँच और चीनी मिलों में तौल प्रक्रिया जैसे मुद्दों पर विचार करेगी। यह समिति किसान प्रतिनिधियों, चीनी मिलों, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित पक्षों से परामर्श भी कर सकती है। समिति का गठन उत्तर प्रदेश के किसानों का बकाया भुगतान तुरंत मिलने या गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) बढ़ने की गारंटी नहीं है।
बकाया भुगतान के लिए किसान क्या करें?
1. रिकॉर्ड सुरक्षित रखें: गन्ना आपूर्ति पर्चियां, तौल पर्चियां, मिल की भुगतान जानकारी और बैंक खाते का विवरण संभालकर रखें।
2. बकाया मिलाएँ: चीनी मिल के गन्ना विभाग से अपने खाते और लंबित भुगतान की जानकारी लें। बैंक में आई राशि से उसका मिलान करें।
3. ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें: उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग के आधिकारिक शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है। शिकायत संख्या सुरक्षित रखें।
4. सहायता लें: पोर्टल पर दिए गए टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 या 1800-103-5823 पर संपर्क करके संबंधित प्रक्रिया की पुष्टि करें।
5. मूल्य की सही दर जाँचें: केंद्र का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) और उत्तर प्रदेश का राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) अलग व्यवस्थाएँ हैं। अपने पेराई सत्र की लागू दर सरकारी आदेश से जाँचें।
किसान शिकायत दर्ज करते समय मिल का नाम, पेराई सत्र, आपूर्ति का विवरण और बकाया राशि का रिकॉर्ड तैयार रखें। इससे मामले की जाँच में मदद मिल सकती है।



