अक्टूबर 2026 में पंजाब और हरियाणा के कुछ इलाकों में बारिश से खेतों में खड़ी धान की फसल गिरने और मंडियों में रखी कटी उपज भीगने की खबरें सामने आई हैं। ऐसी स्थिति में किसानों के लिए जरूरी है कि वे समय रहते पानी की निकासी, अनाज को सुखाने और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था करें। इससे गुणवत्ता खराब होने का जोखिम कम किया जा सकता है।
बारिश के बाद किसान क्या करें?
1. खेत से पानी निकालें: जलभराव होने पर खेत की स्थिति के अनुसार निकासी करें। गिरी फसल को उठाने या काटने से पहले मौसम और फसल की अवस्था देखें।
2. तिरपाल से ढकें: खेत या मंडी में रखे धान को मजबूत तिरपाल से ढकें। तिरपाल के नीचे पानी जमा न होने दें और संभव हो तो उपज को जमीन से ऊपर रखें।
3. भीगे धान को फैलाएं: बारिश रुकने पर धान को साफ, सूखी जगह पर पतली परत में फैलाएं। समय-समय पर पलटें और दोबारा बारिश होने पर सुरक्षित ढक दें।
4. गीला अनाज बंद बोरियों में न भरें: अधिक नमी के साथ भंडारण करने से फफूंद, दुर्गंध और गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ सकता है।
5. नमी की जाँच कराएं: भंडारण से पहले नमी मापक यंत्र से जाँच कराएं। ICAR की कृषि सलाह में भंडारण के लिए धान को सामान्यतः 13–14% नमी तक सुखाने का सुझाव दिया गया है। स्थानीय परिस्थितियों और भंडारण अवधि के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह लें।
6. मंडी के नियम जानें: खरीद केंद्र पर लागू नमी मानक की पुष्टि करें। भंडारण की नमी सीमा और सरकारी खरीद की स्वीकार्य सीमा को एक न समझें।
7. नुकसान का रिकॉर्ड रखें: प्रभावित उपज की तस्वीरें और बिक्री संबंधी दस्तावेज सुरक्षित रखें। बीमा होने पर पॉलिसी की शर्तों के अनुसार संबंधित कंपनी या विभाग को समय पर सूचना दें।
निष्कर्ष: समय पर सुखाना, नमी की जाँच और सुरक्षित भंडारण धान की गुणवत्ता बचाने में मदद कर सकते हैं।



