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कृषि विविधीकरण (Crop Diversification): केवल धान-गेहूं पर निर्भरता क्यों कम करने की चर्चा?

किसानों के लिए फसल का चुनाव केवल बाजार भाव देखकर करना पर्याप्त नहीं है। मिट्टी, पानी, मौसम, स्थानीय बाजार और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखकर खेती की योजना बनाना जरूरी है। 21 सितंबर 2026 को ICAR के एक किसान कार्यक्रम में भी resource-based crop planning, crop diversification और integrated farming को टिकाऊ कृषि से जोड़ा गया।

फसल विविधीकरण क्या है?

इसका मतलब है कि किसान अपनी कृषि व्यवस्था में केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय परिस्थितियों के अनुसार दलहन, तिलहन, सब्जियां, फल, पशुपालन या अन्य कृषि उद्यम को शामिल करे।

किसानों को क्या फायदा हो सकता है?

*आय के एक से अधिक स्रोत बनाने का अवसर।
*किसी एक फसल के जोखिम को कुछ हद तक बांटने की संभावना।
*मिट्टी और पानी के अनुसार फसल चयन करने में मदद।
*पशुपालन या अन्य उद्यम जोड़कर Integrated Farming System अपनाने का विकल्प।
*स्थानीय बाजार के अनुसार मूल्यवर्धन और बिक्री के अवसर तलाशने की संभावना।

ICAR ने भी फसल योजना को उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप रखने पर जोर दिया है।

किसान कैसे शुरू करें?

पूरी जमीन पर अचानक नई फसल लगाने के बजाय किसान छोटे क्षेत्र में परीक्षण कर सकते हैं। बुवाई से पहले स्थानीय मंडी में मांग, पानी की उपलब्धता, उत्पादन लागत, श्रम और संभावित खरीदारों की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।

किसान सलाह: सोशल मीडिया पर वायरल कीमत देखकर पूरी फसल बदलने के बजाय KVK, कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार धीरे-धीरे विविधीकरण करें।

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