भारत की कृषि उपज की मांग घरेलू बाजार के साथ विदेशी बाजारों में भी बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कृषि निर्यात 52.55 अरब डॉलर रहा। निर्यात बाजार बढ़ने से किसानों, FPO और कृषि कारोबार से जुड़े समूहों के लिए नए खरीदारों तक पहुंच बनाने के अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर किसान को निर्यात के कारण सीधे अधिक कीमत मिलना तय है।
किसान को Export से क्या फायदा हो सकता है?
विदेशी बाजार के लिए होने वाली खरीद से अच्छी गुणवत्ता वाली उपज की मांग बढ़ सकती है। निर्यात के लिए उत्पादन करते समय ग्रेडिंग, पैकिंग, खाद्य सुरक्षा, ट्रेसबिलिटी और निर्धारित गुणवत्ता मानकों का ध्यान रखना जरूरी होता है। इससे किसान और FPO अपनी उपज की गुणवत्ता तथा बाजार प्रबंधन को बेहतर बना सकते हैं।
APEDA का Farmer Connect प्लेटफॉर्म FPO, FPC और सहकारी संस्थाओं को निर्यातकों से जोड़ने के लिए बनाया गया है। इसके माध्यम से उत्पाद की जानकारी और बिक्री प्रस्ताव साझा किए जा सकते हैं।
किन फसलों में Export के अवसर?
भारत से चावल, मसाले, फल, सब्जियां, मूंगफली, दालें और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद सहित कई कृषि उत्पादों का निर्यात होता है। APEDA के आंकड़ों में ताजे फल और सब्जियां भी प्रमुख निर्यात श्रेणियों में शामिल हैं।
किसान कैसे तैयारी करें?
किसान निर्यात के लिए अकेले बड़े बाजार की तलाश करने के बजाय FPO, सहकारी संस्था या अधिकृत निर्यातक के माध्यम से अवसर तलाश सकते हैं। बुवाई से पहले खरीदार की गुणवत्ता जरूरत, ग्रेड, पैकिंग और आवश्यक प्रमाणन की जानकारी लेना बेहतर है।
निष्कर्ष: Export बाजार किसानों के लिए अतिरिक्त अवसर खोल सकता है, लेकिन फसल का चुनाव केवल विदेशी मांग देखकर नहीं करना चाहिए। मिट्टी, पानी, उत्पादन लागत, स्थानीय बाजार और वास्तविक खरीदार की मांग को भी ध्यान में रखना जरूरी है।



