दुनिया के कृषि बाजार में सितंबर 2026 के दौरान खाद्य कीमतों में तेजी देखने को मिली है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार सितंबर में FAO Food Price Index 1.5 प्रतिशत बढ़कर 136.0 अंक पर पहुंच गया। अनाज, वनस्पति तेल और चीनी की कीमतों में पिछले महीने की तुलना में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
गेहूं और अनाज की कीमतों में तेजी
FAO के मुताबिक सितंबर में Cereal Price Index 5.1 प्रतिशत बढ़ा, जबकि वैश्विक गेहूं कीमतों में अगस्त की तुलना में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ब्लैक सी क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और व्यापार से जुड़ी बाधाओं तथा कुछ क्षेत्रों में मौसम संबंधी चिंताओं का भी बाजार पर असर पड़ा।
भारतीय किसानों पर क्या असर होगा?
वैश्विक बाजार में कीमत बढ़ने से भारत में भी कुछ कृषि जिंसों के बाजार पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय किसानों को हर फसल पर तुरंत ज्यादा कीमत मिलेगी। देश में MSP, सरकारी खरीद, घरेलू उत्पादन, आयात-निर्यात नियम, मंडी भाव और मांग जैसे कई कारक फसल की कीमत तय करते हैं।
उदाहरण के लिए, सरकार ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए गेहूं का MSP ₹2,610 प्रति क्विंटल तय किया है। इसलिए किसान अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ घरेलू बाजार और सरकारी खरीद व्यवस्था को भी देखें।
किसान अभी क्या करें?
किसान केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार की तेजी देखकर फसल बदलने का फैसला न करें। मिट्टी, पानी, उत्पादन लागत, स्थानीय मंडी भाव और फसल की संभावित मांग को ध्यान में रखकर योजना बनाएं।
फसल बेचते समय स्थानीय मंडी भाव और उपलब्ध सरकारी खरीद व्यवस्था की जानकारी लें। इससे किसान बाजार में होने वाले बदलाव को बेहतर तरीके से समझकर बिक्री का निर्णय ले सकेंगे।



