किसान अपनी उपज को केवल कच्चे माल के रूप में बेचने के बजाय उसकी प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए बाजार में अलग उत्पाद के रूप में बेचने का विकल्प अपना सकते हैं। इसके लिए शुरुआत बड़ी फैक्ट्री से करना जरूरी नहीं है। स्थानीय मांग, उपलब्ध फसल और निवेश क्षमता के आधार पर छोटे स्तर से काम शुरू किया जा सकता है।
किन फसलों की Processing की जा सकती है?
गेहूं से आटा, दलहन से दाल, सरसों से तेल और मिर्च-हल्दी से मसाले तैयार किए जा सकते हैं। फल-सब्जियों से अचार, सूखे उत्पाद, पल्प या अन्य खाद्य उत्पाद बनाए जा सकते हैं। मूंगफली, मक्का और मखाना जैसी उपज की सफाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और वैल्यू एडिशन भी छोटे कारोबार का आधार बन सकती है।
शुरुआत से पहले क्या देखें?
सबसे पहले स्थानीय बाजार में मांग और संभावित ग्राहक पहचानें। इसके बाद मशीन, बिजली, कच्चा माल, श्रम, पैकेजिंग, परिवहन और बिक्री की लागत का अनुमान लगाएं। किसान अकेले निवेश करने के बजाय FPO, स्वयं सहायता समूह या उत्पादक सहकारी संस्था के माध्यम से साझा प्रसंस्करण और पैकेजिंग सुविधा का विकल्प भी देख सकते हैं।
PMFME से मिल सकती है सहायता
PMFME योजना के तहत पात्र individual micro food processing units को eligible project cost पर 35% तक credit-linked capital subsidy, अधिकतम ₹10 लाख प्रति यूनिट तक का प्रावधान है। लाभ योजना की पात्रता और शर्तों के अनुसार मिलता है। FPO, SHG और producer cooperatives के लिए भी अलग सहायता प्रावधान हैं।
किसान इन बातों का रखें ध्यान
खाद्य प्रसंस्करण शुरू करने से पहले FSSAI registration/licence, स्वच्छता, पैकेजिंग, लेबलिंग, भंडारण और बाजार की आवश्यकताओं की जानकारी लेना जरूरी है। FSSAI के अनुसार food business operators के लिए registration या licence की व्यवस्था लागू है।
कच्ची फसल बेचने के साथ उसकी सफाई, ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग किसान को value addition का अवसर दे सकती है।



