उत्तर प्रदेश में सितंबर के अंतिम दिनों में बारिश किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। 28 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से अधिक रही है, लेकिन सभी जिलों में बारिश समान नहीं हुई। कुछ जिलों में अधिक बारिश और कुछ क्षेत्रों में कमी की स्थिति बनी हुई है।
इसका सीधा प्रभाव खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। विशेषकर धान की फसल कई क्षेत्रों में पकने या कटाई की अवस्था में पहुंच रही है। अधिक नमी से खेतों में जलभराव, पौधों के गिरने और कटाई में देरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
बारिश से फसल को नुकसान से कैसे बचाएं?
अगर खेत में पानी जमा है तो किसान जल निकासी की व्यवस्था करें। पक चुकी धान की फसल की कटाई मौसम साफ होने पर प्राथमिकता से करें। कटी फसल को खेत में लंबे समय तक गीला न छोड़ें और सुरक्षित स्थान पर ले जाकर अच्छी तरह सुखाएं।
किसानों के लिए जरूरी सावधानियां
*खेत से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें।
*गिरी हुई फसल को लंबे समय तक पानी में न रहने दें।
*कटी फसल को बारिश से बचाकर रखें।
*अनाज को सुखाने के बाद ही सुरक्षित भंडारण करें।
*खेत में नुकसान की फोटो और वीडियो सुरक्षित रखें।
*रबी की बुवाई से पहले मिट्टी की नमी देखकर खेत तैयार करें।
PMFBY वाले किसान क्या करें?
जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत फसल का बीमा कराया है, उन्हें नुकसान होने पर सूचना देने में देरी नहीं करनी चाहिए। आधिकारिक दिशानिर्देशों में संबंधित नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर देने का प्रावधान है। सूचना बीमा कंपनी, संबंधित बैंक, स्थानीय कृषि अधिकारी या निर्धारित आधिकारिक माध्यम से दी जा सकती है। PMFBY की 14447 हेल्पलाइन पर भी फसल नुकसान की सूचना/शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
महत्वपूर्ण: बीमा में हर बारिश से होने वाला नुकसान स्वतः कवर नहीं माना जाता। कवरेज संबंधित फसल, अधिसूचित क्षेत्र, जोखिम और लागू नियमों पर निर्भर करता है। इसलिए किसान अपनी पॉलिसी और स्थानीय अधिसूचना की जांच जरूर करें।
किसान अभी क्या करें?
बारिश रुकने के बाद खेत का निरीक्षण करें, नुकसान का रिकॉर्ड रखें और बीमा होने पर निर्धारित समय में सूचना दें। समय पर सूचना, सही दस्तावेज और नुकसान का प्रमाण आगे की दावा प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।



