केला देश की प्रमुख फल फसलों में शामिल है और भारत दुनिया के बड़े केला उत्पादक देशों में है। देश में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। उत्तर प्रदेश में भी केले का उत्पादन बढ़ रहा है। सरकारी उत्पादन क्लस्टर में गोरखपुर-कुशीनगर-महराजगंज और फतेहपुर-कौशांबी प्रमुख क्षेत्र बताए गए हैं।
किसान कब लगाएं और कितनी दूरी रखें?
उत्तर प्रदेश की परिस्थितियों में जून-जुलाई में रोपाई को उपयुक्त माना गया है। ICAR ने भी यूपी के किसानों के लिए जून-जुलाई रोपाई की सलाह दी है, जिससे ठंड से होने वाले नुकसान और कुछ रोगों के जोखिम को कम किया जा सके। सामान्य रोपण में लगभग 2×2 से 3×3 मीटर दूरी रखी जा सकती है; वास्तविक दूरी किस्म और खेती की पद्धति के अनुसार तय करनी चाहिए।
रोपाई के लिए स्वस्थ टिश्यू कल्चर पौधे या रोगमुक्त सकर लेना जरूरी है। G-9/Grand Naine उत्तर प्रदेश में व्यापक रूप से उगाई जाने वाली किस्म है।
कौन से रोग सबसे ज्यादा चिंता का विषय हैं?
केले में Fusarium wilt (TR-4) गंभीर रोग है। उत्तर प्रदेश में महाराजगंज, संत कबीर नगर, कुशीनगर और सीतापुर सहित कई क्षेत्रों में इसका प्रकोप दर्ज किया गया है। संक्रमित खेत से पौध सामग्री या मिट्टी दूसरे खेत में ले जाने से बचना और स्वस्थ रोपण सामग्री इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है।
बाजार में मांग कैसी है?
केले की मांग ताजे फल के रूप में बनी रहती है, जबकि चिप्स, पाउडर/फ्लोर, प्यूरी और अन्य प्रसंस्कृत उत्पाद अतिरिक्त बाजार बना सकते हैं। कटाई के बाद बचे केले के तने से Banana Fibre बनाकर रस्सी, मैट, बैग और अन्य उत्पाद भी तैयार किए जा सकते हैं। ICAR ने यूपी के कुशीनगर में Banana Fibre Processing तकनीक के हस्तांतरण की जानकारी दी है।
किसान के लिए जरूरी बात
केले में अच्छी कमाई केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। स्वस्थ पौध, सही दूरी, ड्रिप सिंचाई, रोग प्रबंधन, कटाई के बाद ग्रेडिंग और बेहतर बाजार से जुड़ाव किसान की आय को प्रभावित करते हैं। इसलिए किसान स्थानीय कृषि विभाग/ICAR विशेषज्ञों से क्षेत्र और किस्म के अनुसार सलाह लेकर खेती शुरू करें।



