रबी सीजन 2026 की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार ने राज्यों को पानी की उपलब्धता के आधार पर फसल योजना, गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित उर्वरक उपयोग और खेतों की नियमित निगरानी पर ध्यान देने को कहा है। 28-29 सितंबर 2026 को आयोजित राष्ट्रीय रबी अभियान में फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ जलवायु अनुकूल और टिकाऊ खेती पर भी जोर दिया गया।
गेहूं के साथ दलहन-तिलहन पर जोर
रबी योजना में गेहूं के अलावा चना, मसूर और सरसों जैसी दलहन-तिलहन फसलों को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सरकार ने खास तौर पर उन क्षेत्रों में इन फसलों की संभावनाएं तलाशने की बात कही है, जहां धान की कटाई के बाद खेत खाली रह जाते हैं। इसका उद्देश्य दलहन और खाद्य तेलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना भी है।
पानी के हिसाब से करें फसल का चुनाव
इस बार रबी योजना में पानी की उपलब्धता को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। कम सिंचाई वाले क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत वाली दलहन और तिलहन फसलों पर विचार किया जा सकता है। वहीं पर्याप्त सिंचाई वाले क्षेत्रों में किसान गेहूं सहित अन्य उपयुक्त फसलों की योजना बना सकते हैं। फसल का अंतिम चुनाव मिट्टी, स्थानीय मौसम, सिंचाई और बाजार की स्थिति देखकर करना बेहतर रहेगा।
बुवाई से पहले किसान ये काम करें
किसान बुवाई से पहले मिट्टी की जांच, क्षेत्र के अनुकूल प्रमाणित बीज और बीज उपचार पर ध्यान दें। खाद का इस्तेमाल फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में करें। केवल अधिक यूरिया डालने से उत्पादन बढ़ने की गारंटी नहीं होती।
सरकार ने रबी अभियान में समय पर कृषि इनपुट, फसल विविधीकरण, डिजिटल कृषि, जोखिम प्रबंधन और किसानों तक तकनीकी सलाह पहुंचाने पर भी जोर दिया है।



