अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में बदलाव का असर भारत के तिलहन बाजार पर भी पड़ सकता है। खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार सितंबर 2026 में Vegetable Oil Price Index अगस्त की तुलना में 0.9 प्रतिशत बढ़ा। इस दौरान पाम ऑयल की कीमतों में तेजी प्रमुख कारण रही, जबकि सोया और रेपसीड ऑयल की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रहीं।
खाद्य तेलों की कीमत क्यों बदलती है?
खाद्य तेलों का अंतरराष्ट्रीय बाजार उत्पादन, मौसम, मांग, निर्यात-आयात, जैव ईंधन की जरूरत और परिवहन जैसी परिस्थितियों से प्रभावित होता है। सितंबर में दक्षिण-पूर्व एशिया में मौसम संबंधी चिंताओं और मजबूत वैश्विक आयात मांग ने पाम ऑयल की कीमतों को सहारा दिया। दूसरी ओर, ब्लैक सी क्षेत्र से सूरजमुखी तेल की पर्याप्त आपूर्ति की उम्मीद ने उसकी कीमतों पर अलग असर डाला।
सरसों पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत में सरसों प्रमुख तिलहन फसल है। अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल महंगे रहने पर घरेलू तेल बाजार में सरसों तेल की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मिलों की खरीद पर असर पड़ सकता है। इससे सरसों की मांग और मंडी भाव को समर्थन मिलने की संभावना बन सकती है। लेकिन इसे भाव बढ़ने की गारंटी नहीं माना जा सकता।
घरेलू उत्पादन, मंडी आवक, आयात नीति, तेल मिलों की मांग और सरकारी खरीद भी सरसों के भाव को प्रभावित करेंगे।
किसानों के लिए क्या देखें?
सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए रेपसीड-मस्टर्ड का MSP ₹6,613 प्रति क्विंटल तय किया है। किसानों को बिक्री का फैसला करते समय स्थानीय मंडी भाव, फसल की गुणवत्ता, आवक और उपलब्ध सरकारी खरीद की जानकारी जरूर देखनी चाहिए।



