धान की कटाई के बाद खेत में बची पराली किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। इसे जलाने के बजाय खेत में मिलाना यानी In-situ Crop Residue Management मिट्टी में जैविक पदार्थ वापस पहुंचाने का एक विकल्प है। ICAR के शोध के अनुसार लंबे समय तक फसल अवशेष को खेत में बनाए रखने या मिट्टी में मिलाने से मिट्टी के जैविक कार्बन, उपलब्ध पोषक तत्व और पानी धारण करने की क्षमता में सुधार देखा गया है।
मिट्टी को मिल सकता है जैविक पदार्थ
पराली में मौजूद कार्बनिक पदार्थ और कुछ पोषक तत्व मिट्टी में वापस जाते हैं। इसके अपघटन के साथ मिट्टी के जैविक पदार्थ और सूक्ष्मजीव गतिविधि को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इससे लंबे समय में मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता मिलती है।
अगली फसल के लिए क्या फायदा?
धान के बाद गेहूं जैसी फसल लेने वाले किसान अवशेष प्रबंधन मशीनों की मदद से पराली को खेत में मिला सकते हैं। सरकार भी In-situ residue management को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए Happy Seeder, Super Seeder, Mulcher और अन्य उपयुक्त मशीनों का इस्तेमाल खेत की स्थिति के अनुसार किया जा सकता है।
एक सावधानी जरूरी
पराली मिट्टी में मिलाने के बाद उसके सड़ने में समय लग सकता है। ICAR के अनुसार धान की पराली के तेजी से अपघटन के लिए उपयुक्त bio-decomposer का उपयोग भी एक विकल्प है। किसान स्थानीय मिट्टी, नमी और अगली फसल की बुवाई के समय को देखते हुए तकनीक चुनें।
निष्कर्ष: पराली जलाने के बजाय उसे खेत में मिलाना मिट्टी के जैविक पदार्थ और पोषक चक्र को बनाए रखने में मदद कर सकता है। सही मशीन और समय पर प्रबंधन से किसान अगली फसल की तैयारी भी कर सकते हैं।



