खेती में अक्सर पूरे खेत को एक समान मानकर खाद, पानी और दूसरी कृषि सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन वास्तविकता में खेत के अलग-अलग हिस्सों में मिट्टी की उर्वरता, नमी और फसल की स्थिति अलग हो सकती है। यहीं से Precision Farming यानी सटीक खेती की अवधारणा महत्वपूर्ण हो जाती है।
Precision Farming क्या है?
Precision Farming में खेत से जुड़े डेटा का इस्तेमाल करके यह समझने की कोशिश की जाती है कि किस हिस्से में फसल और मिट्टी की क्या जरूरत है। इसके लिए GPS, soil sensors, satellite imagery, drones, remote sensing, GIS, AI और data analytics जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।
ICAR के Precision Agriculture कार्यक्रम में सेंसर, ड्रोन और सैटेलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग, AI और IoT जैसी तकनीकों पर काम किया जा रहा है। इनका उपयोग फसल और मिट्टी की निगरानी, सिंचाई, पोषक तत्व प्रबंधन और फसल स्वास्थ्य आकलन जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है।
किसान को कैसे मिल सकता है फायदा?
Precision Farming का उद्देश्य जरूरत के अनुसार कृषि इनपुट का इस्तेमाल करना है। उदाहरण के लिए खेत में नमी की जानकारी मिलने पर सिंचाई की योजना बेहतर बनाई जा सकती है। इसी तरह फसल की स्थिति और मिट्टी के डेटा के आधार पर पोषक तत्वों के प्रबंधन में मदद मिल सकती है।
संभावित फायदे:
*पानी के इस्तेमाल की बेहतर योजना
*खाद और अन्य इनपुट के उपयोग को अधिक सटीक बनाने में मदद
*फसल की नियमित निगरानी
*कमजोर या तनावग्रस्त हिस्सों की पहचान
*संसाधनों की बर्बादी कम करने की संभावना
*खेती से जुड़े फैसलों में डेटा का इस्तेमाल
क्या छोटे किसान भी अपना सकते हैं?
Precision Farming का मतलब यह नहीं है कि हर किसान को महंगे ड्रोन, सेंसर या दूसरी मशीनें खरीदनी ही पड़ें। छोटे और सीमांत किसान कस्टम हायरिंग सेंटर, कृषि सेवा प्रदाता, ड्रोन सेवा, मिट्टी जांच और डिजिटल कृषि सलाह जैसी सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं।
सरकार और ICAR भी किसानों के बीच आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रदर्शन और प्रशिक्षण के लिए KVKs तथा अन्य संस्थानों के माध्यम से काम कर रहे हैं।
ध्यान रखने वाली बात
Precision Farming कोई ऐसी तकनीक नहीं है जो हर खेत में एक जैसा परिणाम सुनिश्चित करती हो। तकनीक से मिले डेटा की सही व्याख्या, स्थानीय मौसम, मिट्टी, फसल और कृषि विशेषज्ञ की सलाह भी महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष: Precision Farming का लक्ष्य खेत में ज्यादा तकनीक लगाना नहीं, बल्कि सही जगह, सही समय और जरूरत के अनुसार कृषि इनपुट का इस्तेमाल करना है। आने वाले समय में यह पानी, खाद और अन्य संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में किसानों की मदद कर सकती है।



