सिर्फ एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय किसान खेती के साथ डेयरी, बकरी पालन और मुर्गी पालन को जोड़कर आय के अलग-अलग स्रोत तैयार कर सकते हैं। इस तरह की व्यवस्था को Integrated Farming System (IFS) कहा जाता है। ICAR के अनुसार फसल के साथ पशुपालन और अन्य कृषि गतिविधियों को जोड़ना संसाधनों के बेहतर उपयोग और आजीविका को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
किसान कैसे बना सकते हैं मॉडल?
दूध: एक छोटी डेयरी इकाई से नियमित दूध बिक्री का स्रोत बनाया जा सकता है। खेत में उगाए गए चारे का उपयोग पशुओं के लिए किया जा सकता है।
बकरी पालन: कम संख्या से शुरुआत करके किसान स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल नस्लों और उपलब्ध चारे के आधार पर बकरी पालन विकसित कर सकते हैं। बकरी पालन को फसल आधारित खेती के साथ जोड़ा जा सकता है।
मुर्गी पालन: बैकयार्ड या छोटे पोल्ट्री मॉडल से अंडे और मांस के माध्यम से अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है। ICAR भी poultry को IFS में पूरक आय देने वाला उद्यम बताता है।
सबसे बड़ा फायदा
पशुओं का गोबर और पोल्ट्री अपशिष्ट कम्पोस्ट या जैविक खाद बनाने में उपयोग किया जा सकता है, जबकि फसल अवशेषों का उपयोग चारे के रूप में किया जा सकता है। इससे खेत के संसाधनों का पुनर्चक्रण और इनपुट लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष: किसान अपनी जमीन, पानी, चारा, श्रम और बाजार को ध्यान में रखकर धीरे-धीरे खेती के साथ पशुपालन जोड़ सकते हैं। सही प्रबंधन और स्थानीय विशेषज्ञ की सलाह इस मॉडल को सफल बनाने में महत्वपूर्ण है।



