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कृषि में ग्रीन अमोनिया का प्रयोग: रबी किसानों के लिए क्यों चर्चा में?

Green Ammonia Agriculture India

रबी सीजन 2026 की तैयारियों के बीच उर्वरक उपलब्धता और संतुलित उर्वरक उपयोग के साथ नई कृषि तकनीकों पर भी चर्चा हो रही है। 28 सितंबर 2026 को शुरू हुए राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 में छह राज्यों के 37 जिलों में 10,000 एकड़ क्षेत्र में ग्रीन अमोनिया के बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की योजना की जानकारी दी गई।

ग्रीन अमोनिया क्या है? (What is Green Ammonia?)

ग्रीन अमोनिया अमोनिया बनाने की ऐसी प्रक्रिया से जुड़ा है जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा से उत्पादित हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है। इसका संबंध मुख्य रूप से उर्वरक उद्योग से है, क्योंकि अमोनिया नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों के उत्पादन में महत्वपूर्ण कच्चा पदार्थ है।

भारत में ग्रीन अमोनिया को उर्वरक क्षेत्र को कम-कार्बन तकनीक की ओर ले जाने के प्रयासों से भी जोड़ा जा रहा है। मार्च 2026 में सरकार ने उर्वरक इकाइयों के लिए ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति से जुड़े समझौतों और लगभग 7.24 लाख टन प्रति वर्ष की आवंटित क्षमता की जानकारी दी थी।

किसानों के लिए इसका क्या मतलब है?

ग्रीन अमोनिया का मौजूदा प्रदर्शन मुख्य रूप से यह समझने की दिशा में है कि इस तकनीक का कृषि और उर्वरक क्षेत्र में व्यावहारिक उपयोग किस तरह किया जा सकता है। इससे किसानों के लिए तुरंत पारंपरिक उर्वरकों की व्यवस्था बदलने का मतलब नहीं है।

किसानों को वर्तमान रबी फसलों में मिट्टी की जांच, फसल की जरूरत और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग पर ध्यान देना चाहिए। नई तकनीक के प्रदर्शन से खेत स्तर पर इसकी उपयोगिता, लागत और पर्यावरणीय प्रभाव को समझने में मदद मिल सकती है।

किसान किन बातों का ध्यान रखें?

*बिना सरकारी या विशेषज्ञ सलाह के उर्वरक व्यवस्था में बदलाव न करें।
*प्रमाणित और अधिकृत उर्वरकों का ही इस्तेमाल करें।
*मिट्टी की जांच के आधार पर पोषक तत्वों की जरूरत समझें।
*नई तकनीक के प्रदर्शन को व्यावसायिक उत्पाद उपलब्धता के बराबर न मानें।
*उर्वरक की मात्रा फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार तय करें।

निष्कर्ष

ग्रीन अमोनिया भारत के उर्वरक क्षेत्र में कम-कार्बन उत्पादन की दिशा में विकसित हो रही तकनीक है। रबी अभियान 2026 में 10,000 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित प्रदर्शन से इसके खेत स्तर पर उपयोग और प्रभाव को समझने का अवसर मिलेगा। किसानों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी बात संतुलित और वैज्ञानिक उर्वरक प्रबंधन अपनाना है।

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