रबी सीजन की बुवाई की तैयारी के बीच DAP और यूरिया की उपलब्धता किसानों के लिए अहम मुद्दा है। गेहूं, चना, मसूर और दूसरी रबी फसलों में पोषक तत्वों की जरूरत फसल और मिट्टी के अनुसार अलग-अलग होती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर खाद मिलने में देरी होने पर किसानों की बुवाई और पोषण प्रबंधन की योजना प्रभावित हो सकती है।
केंद्र सरकार के अनुसार देश में उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए मांग का पहले आकलन, राज्यों को आपूर्ति योजना, आयात और रियल-टाइम निगरानी जैसी व्यवस्थाएं अपनाई जाती हैं। वहीं राज्य के भीतर जिला और ब्लॉक स्तर पर खाद का वितरण संबंधित राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।
रबी की बुवाई पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि किसी क्षेत्र में जरूरत के समय DAP या अन्य फॉस्फोरसयुक्त खाद उपलब्ध नहीं होती, तो किसान को पोषक प्रबंधन की योजना बदलनी पड़ सकती है। हालांकि, खाद की कमी को पूरे क्षेत्र या देश की स्थिति मानना सही नहीं होगा।
किसानों को मिट्टी जांच और फसल की अनुशंसित पोषक जरूरत के आधार पर खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। यूरिया की अधिक मात्रा डालना ज्यादा उत्पादन की गारंटी नहीं है। स्थानीय उपलब्धता और सही मात्रा के लिए कृषि विभाग, KVK या अधिकृत विक्रेता से जानकारी लेना बेहतर है।



