रबी सीजन की बुवाई के बीच DAP की उपलब्धता किसानों के लिए अहम मुद्दा बनी हुई है। 30 सितंबर 2026 तक देश में DAP का स्टॉक करीब 23.5 लाख टन बताया गया, जो पिछले साल की समान अवधि से लगभग 17 प्रतिशत अधिक है। उत्तर प्रदेश समेत प्रमुख रबी उत्पादक राज्यों में भी स्टॉक पिछले साल की तुलना में बेहतर बताया गया है।
फिर भी किसी किसान को गांव या नजदीकी खाद केंद्र पर DAP तुरंत न मिले, तो इसे पूरे देश में DAP की कमी नहीं माना जा सकता।
स्थानीय स्तर पर अंतर क्यों?
केंद्र सरकार फसल सीजन से पहले उर्वरक की जरूरत का आकलन करती है और राज्यों के लिए आपूर्ति योजना, आयात तथा लॉजिस्टिक्स की निगरानी करती है। वहीं राज्य के भीतर जिला और ब्लॉक स्तर पर उर्वरक वितरण संबंधित राज्य सरकार के माध्यम से होता है। इसलिए परिवहन, रैक पहुंचने का समय, स्थानीय मांग और बिक्री की गति के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्धता बदल सकती है।
किसानों को जरूरत से ज्यादा DAP जमा करने के बजाय फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद खरीदनी चाहिए। स्थानीय उपलब्धता के लिए अधिकृत विक्रेता या कृषि विभाग से जानकारी लेना बेहतर है।
निष्कर्ष: देश का कुल DAP stock मजबूत होना और हर स्थानीय केंद्र पर उसी समय खाद मिलना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।



