धान की कटाई के दौरान पराली प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार ने निगरानी और खेतों में उपलब्ध विकल्पों को मजबूत करने पर जोर दिया है। 13 अक्टूबर 2026 को कृषि एवं पर्यावरण मंत्रालयों की संयुक्त समीक्षा बैठक में अधिकारियों को पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
दोपहर 3 बजे के बाद क्यों बढ़ेगी निगरानी?
भारत सरकार की प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, दोपहर 3 बजे के बाद उपग्रह निगरानी में अंतराल के दौरान जमीनी गश्त और उड़न दस्तों से निगरानी मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य उन घटनाओं का पता लगाना है, जो उपग्रह से तुरंत दर्ज नहीं हो पातीं।
पराली प्रबंधन के लिए कितनी राशि जारी हुई?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत 2018-19 से 2025-26 तक राज्यों को कुल ₹4,266.47 करोड़ जारी किए गए। इसमें उत्तर प्रदेश के लिए ₹868.67 करोड़, हरियाणा के लिए ₹1,171.71 करोड़ और पंजाब के लिए ₹2,056.50 करोड़ शामिल हैं। ये राज्यवार जारी राशि के आंकड़े हैं, किसी एक किसान को मिलने वाली व्यक्तिगत सहायता नहीं।
किसान पराली का प्रबंधन कैसे करें?
*मशीन की उपलब्धता पूछें: सहकारी समिति या कस्टम हायरिंग सेंटर से सुपर सीडर और हैप्पी सीडर जैसी मशीनों के बारे में जानकारी लें।
*किराया पहले तय करें: मशीन की उपलब्धता, प्रति एकड़ लागत और समय की पुष्टि करें।
*पराली का उपयोग करें: खेत की स्थिति के अनुसार पराली को मिट्टी में मिलाने या मल्च के रूप में इस्तेमाल करने पर कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।
*वैकल्पिक बाजार खोजें: स्थानीय बायोमास इकाइयों, कम्पोस्ट केंद्रों और पराली संग्रह करने वाले समूहों से संपर्क करें।
पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी के लाभकारी जीव तथा पोषक तत्व प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए किसानों को समय पर किफायती मशीनें और व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध होना जरूरी है।
स्रोत: भारत सरकार, PIB की 13 अक्टूबर 2026 की समीक्षा विज्ञप्ति।



