उत्तर प्रदेश में खाद की बिक्री से जुड़े नियमों के तहत गैर-सब्सिडी वाले कृषि पोषक उत्पादों पर प्रतिबंध को लेकर चर्चा जारी है। 14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार ने भी उन कंपनियों के गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री पर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं, जो सरकारी सब्सिडी वाले उर्वरक भी बेचती हैं।
यूपी में कब लागू हुआ था प्रतिबंध?
Business Standard की 16 फरवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 1 जनवरी 2026 से 13 प्रमुख उर्वरक कंपनियों के गैर-सब्सिडी वाले उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया था। वहीं, केंद्र सरकार की 10 मार्च 2026 की PIB विज्ञप्ति ने उत्तर प्रदेश में सब्सिडी वाली खाद के साथ दूसरे उत्पादों की जबरन बिक्री रोकने के लिए 9 जनवरी को जारी आदेश की पुष्टि की।
इस व्यवस्था का उद्देश्य खाद की खरीद के दौरान किसानों पर अतिरिक्त उत्पाद लेने का दबाव रोकना और उर्वरक वितरण में अनियमितताओं पर नियंत्रण करना है।
किसानों पर क्या पड़ सकता है असर?
जबरन टैगिंग रुकने से किसानों को जरूरत के अनुसार खाद खरीदने और अनावश्यक खर्च से बचने में मदद मिल सकती है। दूसरी ओर, उर्वरक उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने चिंता जताई है कि व्यापक प्रतिबंधों से विशेष पोषक तत्वों और जल में घुलनशील उर्वरकों जैसे उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसका वास्तविक असर स्थानीय बाजार और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
*खाद खरीदते समय बिल लें और उत्पाद का नाम तथा कीमत जांचें।
*अतिरिक्त उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर किए जाने पर जिला कृषि अधिकारी से संपर्क करें।
*फसल की जरूरत के अनुसार खाद चुनें और मिट्टी की जांच कराएं।
*किसी उत्पाद पर प्रतिबंध की जानकारी स्थानीय कृषि विभाग से सत्यापित करें।
ध्यान दें: यह प्रतिबंध पूरे देश में सभी गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों पर लागू एक समान प्रतिबंध नहीं है। उत्तर प्रदेश में संबंधित कंपनियों और उत्पादों पर लागू शर्तों की पुष्टि सरकारी आदेश से की जानी चाहिए।



