फसल की अच्छी बढ़वार के लिए केवल ज्यादा खाद डालना जरूरी नहीं है। मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों और फसल की जरूरत के अनुसार संतुलित पोषक प्रबंधन ज्यादा महत्वपूर्ण है। किसान वर्मी कम्पोस्ट को DAP और यूरिया के साथ उचित तरीके से इस्तेमाल करके Integrated Nutrient Management अपना सकते हैं।
DAP और यूरिया का काम क्या है?
DAP मुख्य रूप से नाइट्रोजन और फास्फोरस उपलब्ध कराने वाला रासायनिक उर्वरक है, जबकि यूरिया नाइट्रोजन का प्रमुख स्रोत है। इनकी मात्रा फसल, मिट्टी की स्थिति और अनुशंसित पोषक तत्वों के आधार पर तय करनी चाहिए। जरूरत से ज्यादा यूरिया या DAP डालने से लागत बढ़ सकती है और पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है। ICAR भी मिट्टी जांच के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह देता है।
वर्मी कम्पोस्ट कब उपयोगी है?
वर्मी कम्पोस्ट जैविक खाद का एक स्रोत है। इसका उपयोग मिट्टी में जैविक पदार्थ और पोषक तत्व प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। इसे खेत की तैयारी के समय या संबंधित फसल की कृषि सलाह के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है। अलग-अलग फसलों में इसकी मात्रा अलग हो सकती है।
किसान किसे कब चुनें?
सबसे पहले मिट्टी की जांच कराएं। इसके आधार पर फसल की पोषक जरूरत समझें और अनुशंसित मात्रा में DAP, यूरिया तथा अन्य उर्वरकों का इस्तेमाल करें। वर्मी कम्पोस्ट को जैविक पदार्थ बढ़ाने और समग्र मिट्टी स्वास्थ्य सुधारने के लिए रासायनिक उर्वरकों के साथ जोड़ा जा सकता है।
याद रखें, वर्मी कम्पोस्ट हर स्थिति में DAP या यूरिया का सीधा विकल्प नहीं है। सही तरीका है—मिट्टी जांच, फसल की जरूरत और संतुलित पोषक प्रबंधन।



