सब्जियों की उन्नत पौध तैयार करना किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए व्यवसाय का एक विकल्प बन सकता है। वाराणसी स्थित ICAR–भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) ने ग्राफ्टेड सब्जियों के उत्पादन से जुड़ी सफलता की कहानी साझा की है। संस्थान के अनुसार, 2023–24 से 2025–26 के दौरान 11 प्रशिक्षित किसान उद्यमी बने और चार ने बड़े स्तर पर ग्राफ्टेड पौध उत्पादन का व्यवसाय स्थापित किया।
क्या है ग्राफ्टिंग तकनीक?
ग्राफ्टिंग में एक पौधे की जड़ वाले हिस्से, जिसे रूटस्टॉक कहते हैं, को दूसरे पौधे के ऊपरी हिस्से यानी सायन से जोड़ा जाता है। सही संयोजन और देखभाल से तैयार पौधे कुछ मृदा जनित रोगों तथा प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति बेहतर सहनशीलता दिखा सकते हैं। यह लाभ फसल, रूटस्टॉक और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
ICAR-IIVR ने बैंगन, टमाटर, मिर्च और कद्दूवर्गीय सब्जियों में ग्राफ्टिंग तकनीक विकसित और मानकीकृत की है। संस्थान ने पोमेटो और ब्रिमेटो जैसी तकनीकों पर भी काम किया है।
किसान व्यवसाय कैसे शुरू करें?
1. प्रशिक्षण लें: पौध तैयार करने, ग्राफ्टिंग और नर्सरी प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करें।
2. बाजार की मांग जांचें: आसपास के सब्जी उत्पादकों और नर्सरी संचालकों से पता करें कि किन फसलों की ग्राफ्टेड पौध की मांग है।
3. लागत का हिसाब बनाएं: बीज, रूटस्टॉक, श्रम, ट्रे, संरक्षित नर्सरी, पानी, परिवहन और खराब पौध की लागत जोड़ें।
4. गुणवत्ता पर ध्यान दें: पौध की सेहत, ग्राफ्टिंग जोड़ की मजबूती और संबंधित फसल के लिए उपयुक्तता की जांच करें।
5. छोटे स्तर से शुरुआत करें: सीमित उत्पादन और बिक्री के बाद ही मांग के अनुसार विस्तार करें।
किसानों के लिए जरूरी बात
ICAR-IIVR का अनुभव बताता है कि प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार संपर्क से ग्राफ्टेड पौध उत्पादन ग्रामीण उद्यमिता का विकल्प बन सकता है। हालांकि, मुनाफा निश्चित नहीं है। निवेश से पहले संस्थान या कृषि विज्ञान केंद्र से तकनीकी सलाह और स्थानीय बाजार की जानकारी लें।



