खेती में फसल की वास्तविक उपज का सही अनुमान लगाना किसानों, सरकार और फसल बीमा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इसी दिशा में केंद्र सरकार YES-TECH यानी Yield Estimation System based on Technology का इस्तेमाल कर रही है। इसमें रिमोट सेंसिंग और फसल उपज से जुड़े तकनीकी मॉडलों की मदद से बीमा इकाई स्तर पर उपज का अनुमान तैयार किया जाता है।
YES-TECH क्या है?
YES-TECH को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY के तहत तकनीक आधारित उपज आकलन के लिए शुरू किया गया। इसका उद्देश्य पारंपरिक फसल कटाई प्रयोगों पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करते हुए तकनीकी आंकड़ों को उपज आकलन में शामिल करना है।
सरकारी YES-TECH मैनुअल के अनुसार तकनीक आधारित अनुमान को पारंपरिक yield estimates के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने की व्यवस्था बनाई गई है।
सैटेलाइट से कैसे मिलती है जानकारी?
सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग से बड़े क्षेत्र में फसल की स्थिति और क्षेत्र संबंधी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके साथ मौसम, फसल संबंधी डेटा और crop-yield models का इस्तेमाल करके उपज का तकनीकी अनुमान तैयार किया जाता है। ISRO ने YES-TECH के लिए crop-yield simulation models और स्मार्ट sampling जैसी तकनीकों के विकास में भी योगदान दिया है।
फसल बीमा में किसानों को क्या फायदा?
YES-TECH का उपयोग फसल नुकसान और बीमा दावों के आकलन को अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। सरकार के अनुसार तकनीक आधारित yield estimation से फसल उपज का आकलन बेहतर बनाने और बीमा दावों के निपटारे में सहायता मिल सकती है।
किसान के लिए जरूरी बात
YES-TECH को ऐसी मशीन नहीं समझना चाहिए जो अकेले किसान का मुआवजा तय करती है। यह फसल उपज आकलन की व्यापक प्रक्रिया का एक तकनीकी हिस्सा है, जिसमें राज्य की व्यवस्था और अन्य आंकड़े भी महत्वपूर्ण रहते हैं।
निष्कर्ष: YES-TECH कृषि और फसल बीमा में सैटेलाइट तथा अन्य तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे भविष्य में उपज आकलन को अधिक डेटा-आधारित और व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।



