गन्ना बेचने वाले किसानों के लिए तौल पर्ची, आपूर्ति की तारीख और भुगतान का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना जरूरी है। इन दस्तावेजों से किसान अपनी आपूर्ति और खाते में मिली राशि का मिलान कर सकते हैं। किसी अंतर की स्थिति में शिकायत करते समय भी ये रिकॉर्ड उपयोगी हो सकते हैं।
केंद्र सरकार ने क्या घोषणा की?
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की 12 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार, कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों की समस्याओं पर चर्चा के बाद केंद्र सरकार ने एक सप्ताह के भीतर उच्चस्तरीय संयुक्त समिति गठित करने की घोषणा की।
प्रस्तावित समिति में केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों, किसान संगठनों, चीनी मिलों तथा वैज्ञानिक विशेषज्ञों के प्रतिनिधियों को शामिल करने की बात कही गई है। इसके प्रमुख विषयों में गन्ने की तौल की शुद्धता, चीनी रिकवरी के वैज्ञानिक मानक, प्रयोगशाला जांच और कटाई के समय से जुड़े तकनीकी पहलू शामिल हैं।
यह घोषणा कर्नाटक और महाराष्ट्र के किसानों से संबंधित बैठक के बाद हुई थी। इसे उत्तर प्रदेश के लिए जारी नया सरकारी आदेश नहीं समझना चाहिए।
किसान कौन-से रिकॉर्ड सुरक्षित रखें?
*गन्ना आपूर्ति पर्ची और तौल पर्चा।
*आपूर्ति की तारीख और दर्ज वजन।
*चीनी मिल से मिला भुगतान विवरण।
*बैंक खाते में जमा राशि का रिकॉर्ड।
*शिकायत की रसीद या आवेदन संख्या।
शिकायत कहां करें?
पहले संबंधित चीनी मिल के शिकायत केंद्र से संपर्क करें। समाधान न मिलने पर राज्य के गन्ना विभाग या संबंधित अधिकारी को दस्तावेजों के साथ लिखित शिकायत दें। उत्तर प्रदेश के किसान स्थानीय गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी से मार्गदर्शन ले सकते हैं।
निष्कर्ष: गन्ने की आपूर्ति और भुगतान का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने से किसी विसंगति की जांच करना आसान हो सकता है।



