सहजन (Moringa) बहुउपयोगी पौधा है। इसकी फलियां, पत्तियां और फूल भोजन में इस्तेमाल होते हैं, जबकि पत्तियों से पाउडर जैसे उत्पाद भी बनाए जाते हैं। इसलिए यह किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का अच्छा विकल्प बन सकता है।
🌱 सहजन की खेती का सही समय और तरीका
सहजन की खेती के लिए गर्म जलवायु, पर्याप्त धूप और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त रहती है। उत्तर भारत में इसकी रोपाई के लिए जुलाई-अगस्त का समय सामान्यतः अनुकूल माना जाता है। सिंचाई की सुविधा वाले क्षेत्रों में स्थानीय जलवायु और किस्म के अनुसार समय में बदलाव किया जा सकता है।
खेत की जुताई कर जैविक खाद मिलाएं और स्वस्थ बीज या पौध का चयन करें। उचित दूरी पर पौध लगाकर शुरुआती अवस्था में जरूरत के अनुसार सिंचाई करें। जलभराव से बचाव, निराई-गुड़ाई, संतुलित पोषण और समय पर छंटाई बेहतर विकास में मदद करते हैं।
🛡️ रोगों से बचाव
अधिक नमी और जलभराव से जड़ संबंधी रोगों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए अच्छी जल निकासी, स्वस्थ रोपण सामग्री और साफ खेत रखें। रोगग्रस्त पौधों को समय पर हटाएं और किसी भी उपचार के लिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें।
🥗 उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी
सहजन की पत्तियों में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, आयरन और विटामिन A व C जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसकी फलियों से सब्जी और सूप बनाए जाते हैं, जबकि पत्तियों का उपयोग पाउडर के रूप में भी किया जाता है।
सहजन कम पानी में खेती का विकल्प होने के साथ किसानों की आय और उपभोक्ताओं के पोषण—दोनों के लिए उपयोगी है।



