खेती में पानी की बढ़ती जरूरत और सिंचाई की लागत को देखते हुए माइक्रो-इरिगेशन किसानों के लिए उपयोगी तकनीक बन रही है। Per Drop More Crop (PDMC) का मुख्य उद्देश्य खेत में पानी के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देना है। इसके तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो-इरिगेशन तकनीकों पर जोर दिया जाता है।
ड्रिप सिंचाई से क्या फायदा?
ड्रिप सिस्टम में पानी बूंद-बूंद करके पौधों के जड़ क्षेत्र तक पहुंचाया जाता है। इससे जरूरत के अनुसार सिंचाई करने में मदद मिलती है और खेत में अनावश्यक पानी के बहाव को कम किया जा सकता है। सब्जियों, फलों और कतार वाली फसलों में यह तकनीक विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है।
स्प्रिंकलर से सिंचाई में सुविधा
स्प्रिंकलर सिस्टम पानी को फुहार के रूप में खेत में वितरित करता है। इससे एक बड़े क्षेत्र में अपेक्षाकृत समान सिंचाई करने में मदद मिलती है। यह कई फसलों और अलग-अलग खेत परिस्थितियों में उपयोगी हो सकता है।
किसान कैसे बचा सकते हैं लागत?
सही सिंचाई प्रणाली से पानी और पंपिंग की जरूरत को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सकता है। इससे सिंचाई पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि वास्तविक बचत फसल, मिट्टी, खेत के आकार, पानी के स्रोत और सिस्टम के रखरखाव पर निर्भर करती है।
किसान ध्यान रखें
ड्रिप या स्प्रिंकलर लगाने से पहले फसल, मिट्टी और पानी की उपलब्धता के अनुसार सिस्टम का चयन करें। फिल्टर, पाइप और ड्रिपर/नोजल की नियमित सफाई व रखरखाव भी जरूरी है।
निष्कर्ष: Per Drop More Crop का लक्ष्य पानी के हर उपयोगी हिस्से का बेहतर इस्तेमाल करते हुए कम पानी में अधिक उत्पादन की दिशा में खेती को बढ़ावा देना है।
स्रोत: PMKSY/Per Drop More Crop, भारत सरकार।



