अक्टूबर में मौसम बदलने के साथ तापमान और खेत की नमी में बदलाव होता है। ऐसी परिस्थितियों में टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, पत्तागोभी और अन्य सब्जियों में फफूंद तथा दूसरे रोगों का खतरा फसल और स्थानीय मौसम के अनुसार बढ़ सकता है। समय पर निगरानी और सही प्रबंधन से नुकसान को कम किया जा सकता है।
1. खेत में पानी जमा न होने दें
अधिक नमी और जलभराव से जड़ों तथा तने से जुड़े रोगों का जोखिम बढ़ सकता है। खेत में उचित जल निकासी रखें और जरूरत के अनुसार ही सिंचाई करें। ICAR भी सब्जियों में बेहतर drainage के लिए ridge-furrow या raised-bed जैसी व्यवस्थाओं की सलाह देता है।
2. रोग के शुरुआती लक्षण पहचानें
पत्तियों पर धब्बे, सफेद परत, सड़न, मुरझाना या तने पर असामान्य निशान दिखाई दें तो पौधों की जांच करें। संक्रमित हिस्सों को खेत में पड़े रहने से रोकना और खेत की स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है।
3. स्वस्थ बीज और पौध सामग्री लें
बुवाई के लिए स्वस्थ और प्रमाणित बीज का चयन करें। कुछ सब्जियों में बीज उपचार के लिए Trichoderma जैसे जैविक विकल्प उपयोग किए जाते हैं, लेकिन तरीका और मात्रा फसल तथा उत्पाद की अनुशंसा के अनुसार रखें।
4. खेत की नियमित निगरानी करें
पौधों की पत्तियों और तनों की नियमित जांच करें। रोग की सही पहचान के बिना दवा का छिड़काव न करें।
5. दवा का इस्तेमाल सावधानी से करें
ICAR की IPM सलाह के अनुसार पहले रोकथाम और गैर-रासायनिक उपायों को प्राथमिकता दें। जरूरत पड़ने पर ही फसल और रोग के लिए अनुशंसित, लेबल-स्वीकृत दवा का इस्तेमाल करें।
निष्कर्ष: अक्टूबर में सब्जियों की नियमित निगरानी, उचित जल निकासी, स्वस्थ बीज और खेत की स्वच्छता अपनाकर रोगों से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।



