रबी सीजन 2026-27 में सरसों की बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए सरसों MSP 2027-28 से जुड़ा महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए रेपसीड एवं सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP ₹6,613 प्रति क्विंटल तय किया है। पिछले विपणन सत्र में यह ₹6,200 प्रति क्विंटल था। यानी इस बार MSP में ₹413 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।
सरसों MSP बढ़ने का किसानों के लिए क्या मतलब?
MSP सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य है। इसका उद्देश्य किसानों को निर्धारित फसलों के लिए एक समर्थन मूल्य उपलब्ध कराना है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि किसान को हर मंडी में स्वतः ₹6,613 प्रति क्विंटल का भाव मिलेगा। वास्तविक बिक्री मूल्य मंडी, उपज की गुणवत्ता, मांग, स्थानीय बाजार और सरकारी खरीद की उपलब्धता जैसी परिस्थितियों पर निर्भर कर सकता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2027-28 के लिए रेपसीड एवं सरसों की उत्पादन लागत ₹3,367 प्रति क्विंटल आंकी गई है और MSP को लागत से 96% अधिक स्तर पर रखा गया है।
सरसों की खेती से पहले किसान क्या देखें?
सरसों की बुवाई से पहले खेत की मिट्टी और पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखना जरूरी है। खेत में अच्छा जल निकास होना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक पानी जमा रहने से पौधों की जड़ों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
किसान अपने क्षेत्र और जलवायु के अनुसार प्रमाणित बीज तथा कृषि विभाग या कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित किस्म का चयन करें। बीज उपचार, उचित बुवाई समय और संतुलित पोषण पर ध्यान देना फसल की शुरुआती स्थापना के लिए उपयोगी हो सकता है।
फूल और फलियां बनने के दौरान फसल की नियमित निगरानी करें। कीट दिखाई देने पर पहले उसकी सही पहचान करें और किसी भी कीटनाशी का इस्तेमाल अनुमोदित लेबल और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार ही करें।
क्या MSP बढ़ने से बाजार भाव भी बढ़ेगा?
MSP में बढ़ोतरी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण मूल्य संकेत हो सकती है, लेकिन बाजार भाव की गारंटी नहीं है। किसान बिक्री से पहले स्थानीय मंडी भाव, सरकारी खरीद केंद्र, फसल की गुणवत्ता और परिवहन लागत की जानकारी जरूर लें। Agmarknet जैसी सेवाओं से उपलब्ध मंडी भाव और आवक की जानकारी भी देखी जा सकती है।
निष्कर्ष
सरसों का MSP ₹6,613 प्रति क्विंटल होने से रबी 2027-28 के लिए मूल्य संबंधी महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। फिर भी किसान सिर्फ MSP देखकर फसल का फैसला न लें। मिट्टी, पानी, बीज, उत्पादन लागत, संभावित उपज और स्थानीय बाजार को साथ में देखकर सरसों की खेती की योजना बनाना अधिक व्यावहारिक रहेगा।



