बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाजों का प्रसंस्करण किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और ग्रामीण उद्यमियों के लिए मूल्य संवर्धन का एक विकल्प हो सकता है। कच्चे अनाज की बिक्री के साथ खाद्य उत्पाद तैयार करके स्थानीय बाजारों में नए ग्राहक तलाशे जा सकते हैं। हालांकि, व्यवसाय की सफलता मांग, गुणवत्ता, लागत और बिक्री पर निर्भर करती है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIMR), हैदराबाद ने 13 से 16 अक्टूबर 2026 तक ओडिशा के मिलेट क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों के लिए प्रसंस्करण, उत्पाद विकास और उद्यमिता पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें रागी और छोटे मिलेट्स के उत्पादन, खाद्य उत्पाद बनाने, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और खाद्य सुरक्षा मानकों पर जानकारी दी गई।
मोटे अनाज से कौन-से उत्पाद बनाए जा सकते हैं?
बाजरा, ज्वार और रागी से आटा, लड्डू, चिक्की, स्नैक्स, बेकरी उत्पाद, पास्ता और अन्य खाद्य पदार्थ तैयार किए जा सकते हैं। ICAR-IIMR के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भी ऐसे उत्पादों के निर्माण का व्यावहारिक प्रदर्शन शामिल था।
व्यवसाय शुरू करने से पहले 5 जरूरी बातें
1. बाजार की जाँच: स्थानीय दुकानदारों और ग्राहकों से संभावित मांग तथा बिक्री मूल्य समझें।
2. लागत का हिसाब: कच्चा माल, मशीन, बिजली, मजदूरी, पैकेजिंग और परिवहन का खर्च जोड़ें।
3. खाद्य सुरक्षा: व्यवसाय के प्रकार के अनुसार लागू FSSAI पंजीकरण या लाइसेंस और लेबलिंग नियमों की पुष्टि करें।
4. गुणवत्ता और शेल्फ लाइफ: उत्पाद की सुरक्षित भंडारण अवधि और गुणवत्ता की जाँच कराएँ।
5. प्रशिक्षण: कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि संस्थान या खाद्य प्रसंस्करण विशेषज्ञ से तकनीकी सलाह लें।
छोटे स्तर पर बाजार की जाँच करके शुरुआत करना उपयोगी हो सकता है। FPOs सामूहिक प्रसंस्करण और विपणन की संभावनाएँ भी तलाश सकते हैं। निवेश से पहले स्थानीय मांग और वास्तविक लागत का आकलन जरूर करें।



