धान की कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों के बीच अगली फसल की बुवाई करना किसानों के लिए चुनौती हो सकता है। इस काम में मदद के लिए Mahindra & Mahindra ने MaxSeeder नाम की जीरो-टिल, मल्टी-क्रॉप सीडिंग मशीन का व्यावसायिक उत्पादन और आपूर्ति शुरू की है। कंपनी ने इसकी घोषणा 12 अक्टूबर 2026 को की।
किन फसलों के लिए बनाई गई है मशीन?
कंपनी के अनुसार, MaxSeeder से धान, गेहूं, सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी फसलों की बुवाई की जा सकती है। मशीन कनाडा की Clean Seed Technologies से लाइसेंस प्राप्त तकनीक पर आधारित है और मध्य प्रदेश के पीथमपुर स्थित Mahindra के फार्म मशीनरी प्लांट में बनाई जा रही है।
MaxSeeder की प्रमुख विशेषताएं
*ट्रैक्टर की क्षमता: कंपनी के मुताबिक, इसे 35 HP या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर के साथ चलाया जा सकता है।
*कम जुताई: जीरो-टिल तकनीक के जरिए मिट्टी को कम छेड़ते हुए धान के अवशेषों के बीच बुवाई की जा सकती है।
*बीज और खाद का वितरण: इसमें इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम है, जो बीज, DAP और यूरिया के वितरण को नियंत्रित करने में मदद करता है।
अलग-अलग फसलों के लिए सेटिंग: मशीन में पंक्तियों की दूरी और बुवाई की व्यवस्था को फसल के अनुसार समायोजित किया जा सकता है।
किसानों को क्या फायदा हो सकता है?
कम जुताई से खेत तैयार करने में लगने वाला समय, ईंधन और श्रम घटने की संभावना है। धान के अवशेषों में सीधे बुवाई की सुविधा पराली जलाने का विकल्प भी दे सकती है। हालांकि, वास्तविक बचत और बुवाई की सफलता खेत की स्थिति, अवशेषों की मात्रा, नमी और मशीन के सही संचालन पर निर्भर करेगी।
खरीदने से पहले ये बातें जांचें
कंपनी ने शुरुआती आपूर्ति पंजाब और हरियाणा से शुरू करने की जानकारी दी है। उत्तर प्रदेश में उपलब्धता, कीमत, सर्विस, स्पेयर पार्ट्स और ट्रैक्टर की अनुकूलता के लिए अधिकृत डीलर से संपर्क करें। खरीदने से पहले अपने खेत के हिसाब से लागत और संभावित लाभ का आकलन जरूर करें।
स्रोत: Mahindra की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति।



