कर्नाटक के बेलगावी क्षेत्र में गन्ने के उचित मूल्य और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में बढ़ोतरी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन जारी है। किसानों का कहना है कि खेती की बढ़ती लागत और गन्ने के भुगतान से जुड़े मुद्दों पर ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए।
किसान क्या मांग कर रहे हैं?
13 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारी किसानों की प्रमुख मांगें हैं:
*गन्ने का मूल्य: गन्ने के लिए ₹5,500 प्रति टन की दर तय की जाए।
*चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य: इसे ₹31 से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलोग्राम करने की मांग की गई है।
*तौल और रिकवरी में पारदर्शिता: मिलों में गन्ने का वजन और चीनी की रिकवरी मापने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जाँच हो।
*भुगतान में स्पष्टता: किसानों को मिलने वाली राशि और वजन से जुड़ी कटौतियों का उचित विवरण दिया जाए।
यह समझना जरूरी है कि गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य अलग-अलग हैं। ऊपर दी गई दरें किसानों की मांगें हैं, सरकार द्वारा मंजूर नई दरें नहीं।
केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाया?
14 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों और चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए पूर्व नीति आयोग सदस्य प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता में समिति गठित की। समिति गन्ने के उचित मूल्य, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य, तौल, रिकवरी की जाँच और मशीन से कटाई के दौरान वजन में होने वाली कटौतियों जैसे विषयों पर विचार करेगी।
15 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, समिति गठित होने के बावजूद किसान अपनी मांगों पर आंदोलन जारी रखने के पक्ष में थे। समिति का गठन अपने-आप में मांगें स्वीकार होने का संकेत नहीं है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
गन्ना किसान आपूर्ति पर्ची, तौल पर्ची, भुगतान विवरण और बैंक स्टेटमेंट सुरक्षित रखें। वजन या भुगतान में अंतर होने पर संबंधित चीनी मिल और गन्ना विभाग में लिखित शिकायत करें। यह खबर कर्नाटक के आंदोलन से जुड़ी है; उत्तर प्रदेश के किसान अपने राज्य में लागू दरों और नियमों की पुष्टि संबंधित गन्ना विभाग से करें।



