आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) फसलों को लेकर कानूनी बहस फिर चर्चा में है। 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में GM चावल से संबंधित अवमानना याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि GM फसलों पर अदालत के 2024 के निर्देशों का पालन नहीं हुआ।
क्या है पूरा मामला?
मामले में खरपतवारनाशी-सहिष्णु GM बासमती चावल की कथित मंजूरी और खेती में इसके इस्तेमाल का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, ये आरोप हैं; इन्हें अदालत का अंतिम फैसला या उल्लंघन का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
23 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को GM फसलों पर राष्ट्रीय नीति बनाने और कृषि विशेषज्ञों, राज्य सरकारों तथा किसानों सहित संबंधित पक्षों से परामर्श करने के निर्देश दिए थे। GM सरसों के पर्यावरणीय इस्तेमाल से जुड़े मुद्दे पर न्यायाधीशों की राय अलग-अलग थी।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
बासमती उत्पादकों के लिए बीज की किस्म, फसल की गुणवत्ता और निर्यात बाजार की स्वीकार्यता अहम हैं। GM फसलों से जुड़े नियामकीय फैसले इन विषयों पर चर्चा को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले से किसानों की आय या निर्यात पर निश्चित असर होने का दावा करना अभी उचित नहीं है।
किसानों को क्या करना चाहिए?
*प्रमाणित स्रोत से बीज खरीदें और रसीद सुरक्षित रखें।
*नई किस्म अपनाने से पहले कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें।
*GM चावल की मंजूरी या प्रतिबंध से जुड़ी अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें।
निष्कर्ष: मामले की आगे की स्थिति न्यायालय की सुनवाई और आधिकारिक आदेशों से स्पष्ट होगी। किसानों को सत्यापित जानकारी के आधार पर ही खेती संबंधी निर्णय लेने चाहिए।



