पशुपालन क्षेत्र में डिजिटल रिकॉर्ड को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार भारत पशुधन डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रही है। इसका उद्देश्य पशुओं की पहचान के साथ उनके स्वास्थ्य, प्रजनन और उत्पादकता से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड में रखना है।
सरकारी जानकारी के अनुसार प्रत्येक पंजीकृत पशु को 12 अंकों की बारकोड वाली यूनिक टैग आईडी दी जाती है। इसी पहचान के आधार पर फील्ड कर्मचारी पशु पंजीकरण, कृत्रिम गर्भाधान, प्रजनन गतिविधियां, टीकाकरण, बीमारी की रिपोर्टिंग, ई-प्रिस्क्रिप्शन, राशन संतुलन और दूध उत्पादन जैसी जानकारियां दर्ज करते हैं। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश समेत देश के सभी राज्यों में लागू की गई है।
पशुपालकों के लिए क्यों जरूरी है?
सही डेटा दर्ज होने से पशु की गतिविधियों और स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने में मदद मिलती है। इससे पशुधन से जुड़ी योजनाओं, प्रजनन कार्यक्रमों और रोग निगरानी की बेहतर योजना बनाने में सहायता मिल सकती है।
पशुपालकों को अपने पशुओं की टैग आईडी और जरूरी जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए। किसी रिकॉर्ड में गलती दिखने पर संबंधित पशु चिकित्सा कर्मचारी या स्थानीय पशुपालन विभाग से संपर्क करना उचित है।
ध्यान दें: भारत पशुधन एक डिजिटल रिकॉर्ड और सेवा-सहायक प्रणाली है। केवल डेटा दर्ज होने से किसी सरकारी योजना का लाभ स्वतः मिलने की गारंटी नहीं होती।



