गाय-भैंस पालने वाले किसानों के लिए चारा सिर्फ पशुओं का भोजन नहीं, बल्कि डेयरी की लागत का बड़ा हिस्सा है। बाजार से लगातार हरा चारा खरीदने पर खर्च बढ़ सकता है। ऐसे में रबी मौसम में बरसीम जैसी चारा फसल की पहले से योजना बनाना डेयरी किसानों के लिए उपयोगी हो सकता है।
पहले तय करें, कितने पशुओं के लिए कितना चारा चाहिए?
बरसीम की खेती शुरू करने से पहले अपने पशुओं की संख्या, उपलब्ध जमीन, पानी और पूरे रबी सीजन की चारा जरूरत का अनुमान लगाएं। इससे किसान जरूरत के अनुसार क्षेत्र तय कर सकता है और अनावश्यक खेती से बच सकता है।
बरसीम की खेती के लिए कैसी हो जमीन?
बरसीम के लिए उपजाऊ और पर्याप्त नमी वाली मिट्टी उपयोगी रहती है। खेत में जलभराव नहीं होना चाहिए। अच्छी तरह तैयार खेत में प्रमाणित और क्षेत्र के अनुकूल बीज का उपयोग करें। बुवाई का सही समय और किस्म स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग की सलाह के अनुसार चुनना बेहतर है।
हरे चारे की अच्छी फसल के लिए ये काम जरूरी
बुवाई के बाद खेत की नियमित निगरानी करें। शुरुआती अवस्था में खरपतवार पानी और पोषक तत्वों के लिए बरसीम से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, इसलिए समय पर नियंत्रण जरूरी है।
सिंचाई मिट्टी की नमी और मौसम के अनुसार करें। जरूरत से ज्यादा पानी देने से जलभराव की समस्या हो सकती है।
कटाई में जल्दबाजी या देरी दोनों से बचें
बरसीम को उचित अवस्था पर काटना जरूरी है। बहुत देर से कटाई करने पर तना अधिक कठोर हो सकता है और चारे की स्वीकार्यता प्रभावित हो सकती है। स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार कटाई का समय तय करें।
सिर्फ बरसीम पर निर्भर न रहें
डेयरी पशुओं के लिए पूरे साल हरा चारा + सूखा चारा + अन्य feed resources का संतुलन जरूरी है। पशु की उम्र, वजन, दूध उत्पादन और स्वास्थ्य के अनुसार आहार की जरूरत अलग हो सकती है। जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक या पशु पोषण विशेषज्ञ की सलाह लें।
अपनी जमीन का चारा, डेयरी की लागत पर असर
अपनी जमीन पर चारा उगाने से खरीदे गए हरे चारे पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। लेकिन किसान को बीज, जुताई, सिंचाई, श्रम और जमीन की अवसर लागत को भी हिसाब में शामिल करना चाहिए। तभी वास्तविक fodder cost का पता चलेगा।
निष्कर्ष: डेयरी में सिर्फ दूध का भाव नहीं, चारे की लागत भी कमाई को प्रभावित करती है। इसलिए बरसीम जैसी रबी चारा फसल की योजना पशुओं की संख्या और पूरे साल की feed requirement को ध्यान में रखकर बनाना किसान के लिए ज्यादा व्यावहारिक तरीका है।



