कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग फसल अनुसंधान में नए अवसर खोल रहा है। Google DeepMind और Google.org ने हैदराबाद स्थित अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान ICRISAT तथा दो अमेरिकी शोध संस्थानों के साथ मिलकर ज्वार की आनुवंशिक विविधता का अध्ययन करने की पहल की है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिकों को ऐसी विशेषताओं की पहचान में मदद देना है, जिनसे भविष्य में अधिक जलवायु-अनुकूल और उत्पादक फसल किस्में विकसित की जा सकें।
ज्वार के अनुसंधान में AI कैसे मदद करेगा?
ICRISAT के जीन बैंक में 90 से अधिक देशों के 44,000 से ज्यादा ज्वार बीज नमूनों का संग्रह है। इस संग्रह से चुने गए प्रतिनिधि नमूनों के आनुवंशिक अध्ययन और मशीन लर्निंग के जरिए वैज्ञानिक एक खुली पहुंच वाला वैश्विक आनुवंशिक एटलस तैयार करेंगे।
इस संसाधन से शोधकर्ताओं और पौध प्रजनकों को ज्वार में मौजूद उपयोगी आनुवंशिक विशेषताओं और संभावित संयोजनों को समझने में मदद मिल सकती है। ज्वार का इस्तेमाल भोजन, पशु चारे और अन्य उपयोगों में किया जाता है। शुष्क क्षेत्रों में इसकी भूमिका को देखते हुए जलवायु-अनुकूल किस्मों का अनुसंधान महत्वपूर्ण है।
दूसरी फसलों पर भी होगा अनुसंधान
Google DeepMind, ICRISAT में तीन साल की पोस्टडॉक्टोरल फेलोशिप का समर्थन भी करेगा। इसके माध्यम से चना, मूंगफली और अरहर जैसी दलहनी फसलों के जीनोम को समझने के लिए उपयोगी उपकरण विकसित करने पर काम होगा।
किसानों को क्या लाभ हो सकता है?
बेहतर आनुवंशिक जानकारी से भविष्य में वैज्ञानिकों को सूखा सहनशीलता, उत्पादकता और दूसरी उपयोगी विशेषताओं पर काम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अनुसंधान के नतीजे खेतों में नई किस्म या अधिक उपज के रूप में तुरंत उपलब्ध नहीं होते।
किसानों के लिए जरूरी बात: यह अनुसंधान साझेदारी है, किसानों के लिए नया ऐप या तत्काल उपलब्ध कृषि सलाह सेवा नहीं। बीज चुनते समय स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र की अनुशंसित किस्मों पर भरोसा करें।



