भारतीय चावल के निर्यात बाजार में कीमतें बढ़ी हैं। 16 अक्टूबर 2026 की बाजार रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुछ प्रमुख चावल निर्यात भाव एक साल से अधिक समय के उच्च स्तर पर पहुँच गए। कारोबारियों ने रुपये की मजबूती और धान की आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं को इस तेजी की प्रमुख वजहों में शामिल किया।
कितने रहे चावल के निर्यात भाव?
रिपोर्ट के मुताबिक, 5 प्रतिशत टूटे हुए पारबॉयल्ड चावल का भाव 384 से 389 अमेरिकी डॉलर प्रति टन रहा। पिछले सप्ताह यह 378 से 384 डॉलर प्रति टन था। वहीं, 5 प्रतिशत टूटे सफेद चावल का निर्यात भाव 385 से 390 डॉलर प्रति टन बताया गया।
ये अंतरराष्ट्रीय व्यापार में चावल के भाव हैं। इन्हें स्थानीय मंडियों में बिकने वाले धान के भाव या किसान को मिलने वाली कीमत के समान नहीं समझना चाहिए।
किसानों पर क्या हो सकता है असर?
निर्यात भाव बढ़ने से चावल मिलों और निर्यातकों की खरीद रणनीति प्रभावित हो सकती है। हालांकि, किसानों को इसका लाभ कितना मिलेगा, यह घरेलू मांग, स्थानीय मंडी में आवक, धान की गुणवत्ता और मिलों की खरीद पर निर्भर करेगा।
रिपोर्ट में कुछ राज्यों में सामान्य से कम बारिश के कारण धान की आपूर्ति को लेकर चिंता जताई गई है। इसका असर सभी राज्यों में एक जैसा होना जरूरी नहीं है।
धान बेचने से पहले किसान क्या करें?
*नजदीकी मंडी में धान की किस्म के अनुसार ताजा भाव पता करें।
*सरकारी खरीद केंद्र, खरीद अवधि और लागू नियमों की जानकारी लें।
*नमी, गुणवत्ता और परिवहन खर्च को ध्यान में रखकर बिक्री का निर्णय करें।
*केवल निर्यात भाव बढ़ने की खबर देखकर धान रोकने या तुरंत बेचने का फैसला न करें।
निष्कर्ष: निर्यात बाजार में तेजी किसानों के लिए ध्यान देने योग्य संकेत है, लेकिन सही बिक्री निर्णय के लिए स्थानीय मंडी भाव और खरीद की स्थिति देखना जरूरी है।



