मसूर रबी मौसम की प्रमुख दलहनी फसल है। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में इसकी खेती की जाती है। सही समय पर बुवाई, खेत में उचित नमी और क्षेत्र के अनुकूल किस्म का चुनाव फसल प्रबंधन में मदद करता है। किसानों को बीज खरीदने से पहले अपने जिले की कृषि सलाह जरूर देखनी चाहिए।
मसूर की बुवाई कब और कैसे करें?
1. बुवाई का समय: ICAR की रबी कृषि सलाह के अनुसार, मसूर की बुवाई के लिए मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर तक का समय सामान्य रूप से उपयुक्त माना गया है। स्थानीय मौसम और क्षेत्र के अनुसार सही तारीख बदल सकती है।
2. बीज की मात्रा: सामान्य मसूर फसल के लिए लगभग 30–35 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की सलाह दी गई है। धान के बाद बिना जुताई की पैरा क्रॉपिंग में जरूरत 50–60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है। दोनों प्रणालियों की बीज दर अलग है, इसलिए अपनी खेती की विधि के अनुसार मात्रा तय करें।
3. किस्म का चुनाव: ICAR-IIPR द्वारा सूचीबद्ध IPL 230 किस्म पूर्वी उत्तर प्रदेश के धान के बाद खाली रहने वाले खेतों सहित कुछ परिस्थितियों के लिए उपयुक्त बताई गई है। दूसरी किस्म चुनते समय अपने जिले के लिए उसकी अनुशंसा और उपलब्ध प्रमाणित बीज की पुष्टि करें।
4. खेत और पानी का प्रबंधन: अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी चुनें और खेत में पानी जमा न होने दें। सिंचाई तथा खाद का निर्णय मिट्टी की नमी, जांच और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करें।
5. फसल की निगरानी: पौधों में पीलापन, मुरझाने या रोग के लक्षण दिखें तो पहले कारण की पहचान करें। बिना सही जानकारी के दवा का छिड़काव न करें।
किसानों के लिए सुझाव: बुवाई से पहले कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से अपने क्षेत्र की नवीनतम सलाह लें। बेहतर प्रबंधन मददगार है, लेकिन उपज मौसम, मिट्टी और फसल की देखभाल पर भी
निर्भर करती है।



