भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने कृषि अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और टिकाऊ खेती को किसानों तक पहुँचाने के महत्व पर जोर दिया है। 15 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के करनाल स्थित ICAR-केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान में Emerging Science, Technology and Innovation Conclave (ESTIC-2026) से पहले आयोजित कार्यक्रम में ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने कृषि विज्ञान और तकनीकी विकास में परिषद की भूमिका पर जानकारी दी।
कृषि अनुसंधान में किन क्षेत्रों पर ध्यान है?
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ICAR के प्रमुख क्षेत्रों में जलवायु-अनुकूल खेती, जीन-संपादन, पोषणयुक्त फसल किस्में, एकीकृत कीट प्रबंधन, बागवानी, पशु स्वास्थ्य, मत्स्य पालन, कृषि मशीनीकरण और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में अनुसंधान का उद्देश्य खेती की चुनौतियों के लिए उपयोगी समाधान विकसित करना और वैज्ञानिक जानकारी को खेतों तक पहुँचाना है। हालांकि, किसी तकनीक का अनुसंधान में उल्लेख होने का अर्थ यह नहीं कि वह हर क्षेत्र के लिए उपयुक्त है या किसानों के लिए व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हो चुकी है।
किसानों को वैज्ञानिक शोध से क्या फायदा हो सकता है?
विश्वसनीय कृषि सलाह किसानों को बीज चुनने, मिट्टी और पानी का बेहतर उपयोग करने तथा कीट-रोग प्रबंधन के विकल्प समझने में मदद कर सकती है। लेकिन नई किस्म या तकनीक अपनाने से पहले उसकी स्थानीय उपयुक्तता, लागत, उपलब्धता और प्रशिक्षण की जरूरत जाँचना जरूरी है।
किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विभाग से सलाह ले सकते हैं। बीज खरीदते समय प्रमाणित लेबल और किस्म की जानकारी जाँचें। किसी मशीन या ड्रोन में निवेश करने से पहले संचालन खर्च, रखरखाव और सेवा उपलब्धता का आकलन करें।
ESTIC-2026 क्यों महत्वपूर्ण है?
ESTIC-2026 का आयोजन 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में निर्धारित है। इसमें विज्ञान, तकनीक, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के बीच सहयोग तथा नवाचारों को प्रस्तुत करने के अवसर मिलेंगे। कृषि क्षेत्र से जुड़ी चर्चाओं में शोध और उसके व्यावहारिक उपयोग के बीच बेहतर तालमेल महत्वपूर्ण रहेगा।
किसानों के लिए सबसे उपयोगी कदम है कि वे नई तकनीक संबंधी दावों की पुष्टि वैज्ञानिक संस्थानों या कृषि विशेषज्ञों से करें और अपने खेत की जरूरत के अनुसार ही उसे अपनाएँ।



