उत्तराखंड के हरिद्वार जिले और आसपास के क्षेत्रों में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को आंधी, तेज बारिश और ओलावृष्टि से जनजीवन प्रभावित हुआ। स्थानीय समाचार रिपोर्टों के अनुसार, बड़े आकार के ओलों से वाहनों और कुछ अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। ग्रामीण इलाकों में धान और गन्ने की फसल प्रभावित होने की भी खबरें सामने आई हैं।
फसल नुकसान का आकलन करने के निर्देश
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने संबंधित अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने और नुकसान का आकलन कराने के निर्देश दिए हैं। उपजिलाधिकारियों और कृषि विभाग के अधिकारियों को फसलों की क्षति का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। वास्तविक नुकसान और राहत के लिए पात्रता की स्थिति आधिकारिक आकलन के बाद स्पष्ट होगी।
प्रभावित किसान अभी क्या करें?
ओलावृष्टि से नुकसान झेलने वाले किसानों के लिए ये कदम उपयोगी हो सकते हैं:
*क्षतिग्रस्त फसल और खेत की स्पष्ट तस्वीरें तथा वीडियो सुरक्षित रखें।
*अपने गांव के लेखपाल, कृषि विभाग या संबंधित प्रशासनिक अधिकारी को नुकसान की सूचना दें।
*फसल बीमा कराया है तो बीमा कंपनी से संपर्क करें या प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की हेल्पलाइन 14447 पर सूचना दें।
*दावा दर्ज करने की समयसीमा और आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि करें।
*खेत में जलभराव होने पर जल निकासी और फसल की आगे की देखभाल के लिए कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।
मुआवजे को लेकर क्या ध्यान रखें?
राहत या बीमा भुगतान नुकसान के आकलन, सरकारी नियमों और बीमा पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करता है। इसलिए किसान अपनी शिकायत या सूचना का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें और संबंधित विभाग से आगे की प्रक्रिया पूछें।
किसानों के लिए सलाह: नुकसान की सूचना जल्द दें और मुआवजे की राशि या पात्रता के बारे में केवल आधिकारिक पुष्टि पर भरोसा करें।



