आलू की खेती में बुवाई और खुदाई ऐसे काम हैं जिनमें समय और श्रम की काफी जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में पोटैटो प्लांटर और पोटैटो डिगर जैसी कृषि मशीनें किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बन सकती हैं। ICAR के अनुसार आलू उत्पादन में planting, digging, grading और अन्य कार्यों के लिए कृषि मशीनरी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
पोटैटो प्लांटर क्या काम करता है?
पोटैटो प्लांटर का उपयोग आलू के बीज कंदों को खेत में निर्धारित कतार और दूरी के अनुसार लगाने के लिए किया जाता है। मशीन के डिजाइन के अनुसार इसमें बीज कंदों की metering, furrow opening और मिट्टी से ढकने जैसे कार्य शामिल हो सकते हैं।
मशीन खरीदते समय कतारों की संख्या, बीज कंद की आवश्यकता, रोपण दूरी, कार्यक्षमता और ट्रैक्टर की क्षमता जरूर देखें। अलग-अलग मशीनों की तकनीकी क्षमता अलग हो सकती है।
पोटैटो डिगर क्यों उपयोगी है?
आलू की खुदाई के समय मिट्टी से कंद निकालने के लिए डिगर का इस्तेमाल किया जा सकता है। ICAR के अनुसार आलू की खेती में diggers सहित विभिन्न मशीनें खुदाई और फसल प्रबंधन के काम को अधिक यंत्रीकृत बनाने में मदद करती हैं।
इससे हाथ से होने वाले श्रम पर निर्भरता कम करने और समय पर खुदाई पूरी करने में मदद मिल सकती है। हालांकि वास्तविक बचत खेत, मशीन, मिट्टी और संचालन पर निर्भर करेगी।
खरीद से पहले किसान क्या देखें?
*ट्रैक्टर की HP और लिफ्ट क्षमता।
*मशीन की कार्यक्षमता और खेत का आकार।
*स्थानीय मिट्टी और खेत की स्थिति।
*सर्विस तथा स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता।
*मशीन की performance testing और उपयुक्तता।
*सरकारी कृषि मशीनीकरण योजना में उपलब्ध सहायता और पात्रता।
छोटे किसान मशीन खरीदने के बजाय Custom Hiring Centre से किराये पर मशीन लेने का विकल्प भी देख सकते हैं। सरकार कृषि मशीनीकरण के तहत Custom Hiring Centres को भी बढ़ावा देती है।
निष्कर्ष: पोटैटो प्लांटर और डिगर आलू की बुवाई और खुदाई में समय तथा श्रम प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। लेकिन मशीन का चयन खेत और ट्रैक्टर की जरूरत के अनुसार करना जरूरी है।



