किसान की आय केवल एक फसल पर निर्भर रहने से मौसम, बाजार भाव और उत्पादन में बदलाव का असर बढ़ सकता है। ऐसे में डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन और मछली पालन जैसी allied activities को खेती के साथ जोड़कर आय के स्रोतों में विविधता लाने पर विचार किया जा सकता है। ICAR भी Integrated Farming System में फसल के साथ पशुधन, मछली और अन्य गतिविधियों के एकीकरण को संसाधनों के बेहतर उपयोग और आय विविधीकरण से जोड़ता है।
डेयरी में किन बातों पर ध्यान दें?
डेयरी शुरू करने से पहले पशु की नस्ल, उम्र, स्वास्थ्य, दूध उत्पादन और चारे की उपलब्धता की जांच जरूरी है। संतुलित आहार पशु स्वास्थ्य और दूध उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। NDDB के अनुसार पशु की जरूरत के अनुसार संतुलित ration देने से feed cost और उत्पादन दोनों को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है।
बकरी और मुर्गी पालन में क्या देखें?
बकरी पालन में स्थानीय नस्ल, उपलब्ध चारा, स्वास्थ्य देखभाल और बाजार की मांग महत्वपूर्ण हैं। मुर्गी पालन में feed cost, स्वच्छता, तापमान प्रबंधन और बीमारी से बचाव पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। दोनों गतिविधियों को शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार और बिक्री व्यवस्था समझना जरूरी है।
मछली पालन में पानी सबसे महत्वपूर्ण
मछली पालन करने वाले किसानों को तालाब की पानी की गुणवत्ता, ऑक्सीजन, stocking और feed management पर नियमित नजर रखनी चाहिए। हर किसान के लिए एक जैसा मॉडल उपयुक्त नहीं होता।
शुरुआत छोटे स्तर से करें
किसान पहले अपनी जमीन, पानी, चारा, श्रम और बाजार के अनुसार छोटी इकाई से शुरुआत कर सकते हैं। रोजाना खर्च, उत्पादन और बिक्री का रिकॉर्ड रखें। बैंक ऋण या योजना लेने से पहले कुल निवेश, EMI और नकदी प्रवाह का आकलन करना जरूरी है।
निष्कर्ष: पशुपालन अतिरिक्त आय का विकल्प बन सकता है, लेकिन लाभ अपने-आप सुनिश्चित नहीं होता। बेहतर परिणाम के लिए चारा, पशु स्वास्थ्य, प्रबंधन और बाजार की योजना जरूरी है।



