लखनऊ: गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से राजधानी के कई निचले और ग्रामीण इलाकों में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। इसका असर नदी के आसपास खेती करने वाले किसानों की फसलों पर भी पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार सैथा समेत कुछ क्षेत्रों में धान और सब्जियों के खेत जलमग्न हुए हैं।
किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता तैयार धान और लंबे समय तक पानी में रहने वाली अन्य फसलों को लेकर है। खेतों में लगातार जलभराव रहने से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। पानी उतरने के बाद खेत की स्थिति देखकर ही अगली सिंचाई, खाद और अन्य कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और निगरानी बढ़ाई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर राहत व्यवस्था की जानकारी ली। सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सहायता और जलनिकासी से जुड़े उपायों पर भी काम किया जा रहा है।
किसानों को सलाह है कि प्रभावित खेतों की फोटो और फसल नुकसान का विवरण सुरक्षित रखें। यदि प्रशासन की ओर से सर्वे या राहत संबंधी प्रक्रिया शुरू होती है तो स्थानीय अधिकारियों के निर्देश के अनुसार जानकारी उपलब्ध कराएं।
नोट: बाढ़ का असर खेत की स्थिति, पानी की गहराई और फसल की अवस्था के अनुसार अलग हो सकता है।



