रागी (Finger Millet) को पोषक अनाजों में महत्वपूर्ण स्थान मिलता है। इसमें कैल्शियम, फाइबर, प्रोटीन और कई खनिज पाए जाते हैं, इसलिए इसकी मांग पारंपरिक भोजन के साथ-साथ हेल्थ फूड के रूप में भी बढ़ रही है। रागी से आटा, दलिया, माल्ट, बिस्किट और अन्य खाद्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
🌱 कब और कैसे करें खेती?
रागी की बारानी खेती के लिए जून-जुलाई सामान्य बुवाई अवधि है। कुछ क्षेत्रों में सितंबर-अक्टूबर में भी इसकी खेती की जाती है। इसलिए किसान अपने स्थानीय मौसम और उपलब्ध किस्म के अनुसार बुवाई का समय चुनें।
खेत को भुरभुरा और समतल तैयार करके प्रमाणित बीज का इस्तेमाल करें। लाइन में बुवाई करने से पौधों की संख्या नियंत्रित रखने और निराई-गुड़ाई में सुविधा होती है। सामान्यतः लाइन से लाइन दूरी करीब 22.5–30 सेमी रखी जाती है।
🐛 रोग-कीट से बचाव
रागी में ब्लास्ट रोग प्रमुख समस्याओं में शामिल है। इससे पत्तियों और बालियों पर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। स्वस्थ बीज, उचित दूरी, समय पर बुवाई और खेत में अनावश्यक नमी से बचाव रोग प्रबंधन में मदद करता है। पत्ती मोड़क जैसे कीट भी समस्या बन सकते हैं।
💰 किसान और Consumer दोनों के लिए अवसर
रागी को केवल अनाज के रूप में बेचने के बजाय किसान साफ-सफाई, मिलिंग और पैकेजिंग के जरिए value addition कर सकते हैं। रागी आटा, माल्ट और ready-to-cook products स्थानीय बाजार में अतिरिक्त कमाई का रास्ता बना सकते हैं।
इस तरह रागी खेती को पोषण, बाजार और value addition से जोड़कर किसान अपनी आय के नए अवसर तलाश सकते हैं।



