- Advertisement -Newspaper WordPress Theme
फल-फूल और सब्जीसब्जियों की खेतीमटर की खेती: रबी सीजन में किसान कब और कैसे करें बुवाई?

मटर की खेती: रबी सीजन में किसान कब और कैसे करें बुवाई?

रबी सीजन में मटर की खेती किसानों के लिए अच्छी मांग वाली फसल का विकल्प है। हरी मटर की सब्जी के साथ दाने और बीज के लिए भी इसकी खेती की जाती है। अच्छी फसल के लिए सही समय पर खेत तैयार करना, गुणवत्तापूर्ण बीज चुनना और शुरुआती अवस्था से फसल की निगरानी करना जरूरी है।

खेत की तैयारी कैसे करें?

मटर के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। खेत से पिछली फसल के अवशेष और खरपतवार हटाकर मिट्टी की स्थिति के अनुसार 2–3 जुताई करें और पाटा लगाकर खेत को समतल एवं भुरभुरा बनाएं। खेत में पानी रुकने से बचें, क्योंकि अधिक नमी से जड़ और फफूंद संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। मिट्टी जांच के आधार पर खाद और उर्वरक की योजना बनाना बेहतर है।

मटर का बीज कब और कैसे चुनें?

किसान अपने क्षेत्र और खेती के उद्देश्य के अनुसार प्रमाणित एवं अनुशंसित किस्म का बीज खरीदें। बीज खरीदते समय पैकेट की सील, किस्म, बैच नंबर और वैधता जैसी जानकारी जरूर देखें। ICAR की रबी सलाह में खेत मटर के लिए 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक की अवधि को उपयुक्त बताया गया है। किस्म और स्थानीय मौसम के अनुसार समय में बदलाव हो सकता है।

बुवाई से पहले बीज उपचार के लिए स्थानीय कृषि विभाग या KVK की वर्तमान सलाह अपनाएं। Rhizobium जैसे जैव उर्वरक का उपयोग भी स्थानीय अनुशंसा के अनुसार किया जा सकता है।

बुवाई और सिंचाई

ICAR की सलाह में किस्म के अनुसार लगभग 22.5–45 सेमी कतार दूरी और 10 सेमी पौधा दूरी का उल्लेख है। बीज को करीब 4–5 सेमी गहराई पर बोना उपयोगी रहता है।

मटर में अत्यधिक सिंचाई से बचें। मिट्टी और मौसम के अनुसार जरूरत होने पर सिंचाई करें। ICAR की सलाह में सामान्य परिस्थितियों में लगभग 45 दिन बाद तथा आवश्यकता होने पर फली भरने के समय सिंचाई का उल्लेख है।

रोग और कीट से बचाव

फसल में पाउडरी मिल्ड्यू, डैम्पिंग-ऑफ और अन्य फफूंदजनित समस्याओं पर नजर रखें। ICAR के अनुसार अधिक नमी, बादल और उच्च आर्द्रता से कुछ फफूंद रोगों का खतरा बढ़ सकता है। खेत में जलभराव न होने दें और नियमित निरीक्षण करें।

कीट या रोग दिखाई देने पर पहले उसकी सही पहचान करें। जैविक और यांत्रिक उपायों को प्राथमिकता देते हुए आवश्यकता पड़ने पर ही मटर के लिए स्वीकृत कृषि-रसायन का वर्तमान लेबल निर्देश और स्थानीय विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार प्रयोग करें।

तुड़ाई और बाजार तक पहुंच

हरी मटर की फलियां कोमल और दाने विकसित होने की अवस्था में बाजार के लिए तोड़ी जाती हैं। एक साथ पूरी फसल बेचने के बजाय उपज की गुणवत्ता और स्थानीय मांग के अनुसार चरणबद्ध तुड़ाई की जा सकती है।

बिक्री से पहले किसान स्थानीय मंडी, थोक बाजार, सब्जी विक्रेताओं और FPO जैसे विकल्पों में भाव और मांग की जानकारी लें। मटर की कीमत मौसम, आवक, गुणवत्ता और बाजार के अनुसार बदलती है, इसलिए किसी निश्चित भाव या मुनाफे की गारंटी नहीं मानी जानी चाहिए।

किसान के लिए आसान योजना

खेत की तैयारी → प्रमाणित बीज → समय पर बुवाई → उचित नमी → खरपतवार व रोग-कीट निगरानी → समय पर तुड़ाई → गुणवत्ता के अनुसार बाजार चयन

निष्कर्ष: मटर की खेती में सही बुवाई समय, स्वस्थ बीज, अच्छी जल निकासी और नियमित फसल निगरानी महत्वपूर्ण हैं। स्थानीय मौसम और कृषि विभाग/KVK की सलाह के अनुसार प्रबंधन करने से किसान फसल को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं।

Subscribe Today

GET EXCLUSIVE FULL ACCESS TO PREMIUM CONTENT

SUPPORT NONPROFIT JOURNALISM

EXPERT ANALYSIS OF AND EMERGING TRENDS IN CHILD WELFARE AND JUVENILE JUSTICE

TOPICAL VIDEO WEBINARS

Get unlimited access to our EXCLUSIVE Content and our archive of subscriber stories.

Exclusive content

- Advertisement -Newspaper WordPress Theme

Latest article

More article

- Advertisement -Newspaper WordPress Theme