खेती में पानी का सही इस्तेमाल फसल की देखभाल और सिंचाई खर्च को नियंत्रित करने के लिए जरूरी है। Variable Rate Irrigation (VRI) यानी परिवर्तनीय दर सिंचाई ऐसी तकनीक है, जिसमें खेत के अलग-अलग हिस्सों में जरूरत के अनुसार पानी की मात्रा बदली जा सकती है।
क्या है Variable Rate Irrigation?
एक ही खेत में मिट्टी की बनावट, ढलान, जल निकासी और नमी अलग-अलग हो सकती है। ऐसे में समान मात्रा में पानी देने से कुछ हिस्सों में अधिक नमी और दूसरे हिस्सों में पानी की कमी हो सकती है।
VRI विशेष उपकरणों और नियंत्रण प्रणालियों की मदद से अलग-अलग क्षेत्रों में सिंचाई की मात्रा समायोजित करती है। हालांकि, इसके लिए उपयुक्त मशीनरी, खेत से संबंधित आंकड़ों और तकनीकी प्रबंधन की जरूरत होती है। इसलिए यह तकनीक हर छोटे खेत के लिए जरूरी या किफायती नहीं है।
छोटे किसान कम खर्च में पानी कैसे बचाएं?
महंगी प्रणाली लगाए बिना भी किसान सिंचाई प्रबंधन बेहतर कर सकते हैं।
*मिट्टी की नमी देखें: फसल की अवस्था और खेत की नमी के अनुसार सिंचाई का समय तय करें।
*रिसाव रोकें: पाइप, नालियों और पंप की नियमित जांच करें।
*ड्रिप या स्प्रिंकलर अपनाने पर विचार करें: फसल और खेत की स्थिति के अनुसार उपयुक्त विकल्प चुनें।
*सिंचाई का रिकॉर्ड रखें: पानी देने की तारीख और अवधि लिखें, ताकि जरूरत का बेहतर आकलन हो सके।
*निवेश से पहले लागत जांचें: उपकरण, बिजली, मरम्मत और रखरखाव का खर्च संभावित बचत से मिलाएं।
सरकारी सहायता कहां मिलेगी?
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत Per Drop More Crop (PDMC) घटक ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा देता है। सहायता की पात्रता और उपलब्धता राज्य के नियमों के अनुसार जांचनी चाहिए।
निष्कर्ष: स्मार्ट सिंचाई का उद्देश्य खेत की जरूरत के अनुसार पानी का बेहतर प्रबंधन करना है। किसान पहले कम लागत वाले उपाय अपनाएं और किसी महंगी तकनीक में निवेश से पहले कृषि विभाग या सिंचाई विशेषज्ञ से सलाह लें।



