खेती में विविधता लाने के लिए किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ लेमनग्रास जैसी सुगंधित फसलों पर भी ध्यान दे रहे हैं। इसकी पत्तियों से आवश्यक तेल निकाला जाता है, जबकि इसका उपयोग भोजन और हर्बल चाय में भी किया जाता है। उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में इसकी खेती होती है।
लेमनग्रास की खेती कैसे करें?
लेमनग्रास के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त रहती है। खेत में लंबे समय तक पानी जमा नहीं होना चाहिए। इसकी खेती के लिए स्वस्थ पौध या स्लिप का इस्तेमाल किया जाता है। खेत तैयार करने के बाद रोपाई करें और शुरुआती अवस्था में पर्याप्त नमी बनाए रखें। मौसम और मिट्टी की स्थिति के अनुसार सिंचाई करें तथा समय-समय पर खरपतवार निकालते रहें।
CSIR-CIMAP ने लेमनग्रास की कई किस्मों पर काम किया है, जिनमें कावेरी, कृष्णा, CIMAP-सुवर्णा और अन्य किस्में शामिल हैं। किसान अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्त किस्म का चयन कृषि विशेषज्ञ की सलाह से करें।
रोग और बचाव
जलभराव और खराब रोपण सामग्री से पौधों में जड़ संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए खेत में पानी न रुकने दें, स्वस्थ पौध लगाएं और संक्रमित पौधों को अलग करें। किसी भी कृषि रसायन का प्रयोग स्थानीय विशेषज्ञ की सलाह और लेबल निर्देश के अनुसार करें।

किसान को कैसे मिलता है बाजार?
लेमनग्रास की कटाई के बाद इसकी पत्तियों से डिस्टिलेशन प्रक्रिया द्वारा आवश्यक तेल निकाला जाता है। तेल का उपयोग परफ्यूमरी, फ्लेवर और अन्य उद्योगों में होता है। इसका प्रमुख घटक सिट्रल है।
किसान FPO या समूह बनाकर सामूहिक रूप से डिस्टिलेशन और बिक्री की व्यवस्था कर सकते हैं। खेती शुरू करने से पहले स्थानीय खरीदार और प्रसंस्करण सुविधा की जानकारी लेना जरूरी है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या फायदे?
लेमनग्रास सिर्फ किसान के लिए बाजार वाली फसल नहीं है। ताजा या सूखी लेमनग्रास की पत्तियों का इस्तेमाल चाय, सूप, करी और अन्य व्यंजनों में स्वाद और सुगंध के लिए किया जाता है। इसकी हल्की नींबू जैसी खुशबू भोजन और पेय पदार्थों को अलग स्वाद देती है।
लेमनग्रास से बनने वाले आवश्यक तेल का उपयोग सुगंधित उत्पादों और फ्लेवर से जुड़े उद्योगों में भी होता है। हालांकि, लेमनग्रास या इसके तेल को किसी बीमारी के इलाज के रूप में इस्तेमाल करने का दावा नहीं करना चाहिए।
किसान ध्यान रखें
लेमनग्रास से आमदनी फसल की गुणवत्ता, तेल की मात्रा, डिस्टिलेशन लागत और बाजार भाव पर निर्भर करती है। इसलिए बड़े क्षेत्र में खेती शुरू करने से पहले स्थानीय जलवायु, रोपण सामग्री, खरीदार और प्रसंस्करण की उपलब्धता जरूर जांचें।
निष्कर्ष
लेमनग्रास किसानों के लिए खेती में विविधीकरण का विकल्प है और उपभोक्ताओं के लिए भोजन, चाय, सुगंध तथा विभिन्न उत्पादों में उपयोगी पौधा है। सही किस्म, अच्छी देखभाल और बाजार से जुड़ी योजना के साथ किसान इसे अपनी खेती में शामिल करने पर विचार कर सकते हैं।



