टमाटर की खेती किसानों के लिए प्रमुख सब्जी फसलों में शामिल है। इसकी खेती खुले खेत के साथ पॉलीहाउस और अन्य संरक्षित परिस्थितियों में भी की जाती है। अच्छी फसल के लिए सही मौसम, स्वस्थ पौध, उचित दूरी, सिंचाई, पोषण और रोग-कीट प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है।
टमाटर की खेती कब करें?
टमाटर की बुवाई और रोपाई का समय क्षेत्र, तापमान, किस्म और खेती की प्रणाली पर निर्भर करता है। इसलिए पूरे देश के लिए एक ही तारीख बताना सही नहीं होगा। उत्तर भारत में रबी फसल के लिए स्थानीय मौसम के अनुसार नर्सरी और रोपाई का कार्यक्रम तय किया जाता है। उदाहरण के तौर पर ICAR के एक रबी प्रदर्शन में सितंबर के पहले सप्ताह में बीज बोकर सितंबर के अंत में रोपाई की गई थी। वहीं दूसरे क्षेत्र में टमाटर की नर्सरी जनवरी-फरवरी और रोपाई मार्च-अप्रैल में की गई। इसलिए किसान अपने जिले की कृषि सलाह को प्राथमिकता दें।
बीज और पौध तैयार करना
किसान अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्त प्रमाणित बीज या स्वस्थ नर्सरी पौध चुनें। किस्म का चुनाव स्थानीय मौसम, रोग की स्थिति और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर करें। NIPHM की IPM सलाह में टमाटर की कई रोग-सहनशील या प्रतिरोधी किस्मों का उल्लेख किया गया है।
नर्सरी में स्वस्थ पौध तैयार करें और खेत में रोपाई से पहले कमजोर या रोगग्रस्त पौध को अलग कर दें। खेत में जलभराव से बचने के लिए उचित जल निकास रखें।
पौधों की दूरी कितनी रखें?
टमाटर में दूरी किस्म और उत्पादन प्रणाली के अनुसार बदलती है। ICAR की एक कृषि सलाह में 90×75 सेमी या 70×60 सेमी दूरी के उदाहरण दिए गए हैं। इसलिए किसान बीज की किस्म और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार दूरी तय करें।
बहुत ज्यादा घनी रोपाई से खेत में हवा का आवागमन प्रभावित हो सकता है और नमी बढ़ने से कुछ रोगों का खतरा बढ़ सकता है।
सिंचाई और पोषण
मिट्टी में आवश्यक नमी बनाए रखें, लेकिन लगातार पानी जमा न होने दें। सिंचाई की मात्रा मिट्टी, मौसम, फसल अवस्था और सिंचाई प्रणाली के अनुसार तय करें। खाद और उर्वरक की मात्रा मिट्टी जांच और फसल की जरूरत के आधार पर रखना बेहतर है। अधिक नाइट्रोजन देने से अधिक उत्पादन की गारंटी नहीं होती।
रोग और कीट से कैसे बचाएं?
टमाटर में लीफ कर्ल वायरस, बैक्टीरियल विल्ट, अर्ली ब्लाइट, लेट ब्लाइट, फल छेदक और लीफ माइनर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। NIPHM के अनुसार स्वस्थ पौध, खेत की स्वच्छता, उचित जल निकास, फसल निगरानी और आवश्यक सांस्कृतिक उपाय IPM का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
ICAR-IIHR भी टमाटर में फल छेदक, लीफ माइनर, माइट और कीट वाहकों के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन की सलाह देता है। आवश्यकता होने पर ही फसल और कीट के अनुसार अनुमोदित एवं लेबल-निर्देशित कीटनाशक का उपयोग करें।
तुड़ाई और बाजार
टमाटर को बाजार और उपयोग के अनुसार हरी, हल्की पकी या पूरी तरह रंग आने की अवस्था में तोड़ा जा सकता है। तुड़ाई के बाद ग्रेडिंग, साफ पैकिंग और समय पर बाजार तक पहुंचाना गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करता है।
बुवाई से पहले किसान स्थानीय मंडी, थोक व्यापारियों, होटल-रेस्टोरेंट और अन्य खरीदारों की मांग तथा संभावित भाव की जानकारी लें। इससे फसल तैयार होने के समय बाजार जोखिम को समझने में मदद मिल सकती है।
टमाटर से कमाई कितनी होगी?
टमाटर की कमाई उपज, खेती की लागत, किस्म, मौसम और बाजार भाव पर निर्भर करती है। इसलिए सभी किसानों के लिए एक निश्चित ₹/एकड़ कमाई बताना सही नहीं होगा। पॉलीहाउस में निवेश और उत्पादन लागत खुले खेत से अलग हो सकती है।
निष्कर्ष: टमाटर की खेती में सफलता केवल अच्छी किस्म चुनने पर निर्भर नहीं करती। सही समय, स्वस्थ पौध, उचित दूरी, संतुलित पोषण, सिंचाई, रोग-कीट निगरानी और बाजार की तैयारी सभी जरूरी हैं। किसान अंतिम बुवाई और रोपाई का समय अपने जिले की कृषि सलाह के अनुसार तय करें।



