खुरपका-मुंहपका रोग से पशुओं को कैसे बचाएं?
खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है। यह गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर जैसे खुर वाले पशुओं को प्रभावित कर सकती है। संक्रमण से दूध उत्पादन घट सकता है और पशु कमजोर हो सकते हैं। छोटे बछड़ों में बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
बीमार पशु को बुखार, भूख में कमी, मुंह या जीभ पर छाले, ज्यादा लार गिरने, खुरों के बीच घाव और लंगड़ाने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। दूध देने वाले पशु में दूध अचानक कम हो सकता है। भेड़ और बकरियों में लंगड़ापन प्रमुख संकेत हो सकता है। हालांकि, केवल लक्षण देखकर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
संक्रमण फैलने से रोकने के उपाय
* संदिग्ध पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।
* पशुशाला में लोगों और पशुओं की आवाजाही सीमित करें।
* बर्तन, उपकरण, वाहन और पशुशाला की सफाई व कीटाणुशोधन पशु चिकित्सक की सलाह से करें।
* बीमार पशु को बाजार, मेले या सामूहिक चराई में न ले जाएं।
* बिना पशु चिकित्सक की सलाह के दवा या घरेलू उपचार न करें।
यह संक्रमण संक्रमित पशु के संपर्क और दूषित उपकरणों या सामग्री से फैल सकता है। इसलिए बीमारी की आशंका होने पर तुरंत स्थानीय पशु चिकित्सक या पशुपालन विभाग को सूचना दें।
टीकाकरण क्यों जरूरी है?
भारत में राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत खुरपका-मुंहपका रोग की रोकथाम के लिए टीकाकरण किया जाता है। किसान अपने क्षेत्र में अगला टीकाकरण अभियान, पशु की पात्रता और निर्धारित समय पशु चिकित्सालय से पता करें।
पशुपालकों के लिए सलाह: समय पर सूचना, पशुओं को अलग रखना और विभागीय टीकाकरण कार्यक्रम का पालन संक्रमण नियंत्रण में मदद करता है।



