पशु नस्ल सुधार, आलू प्रसंस्करण और गोबर से ईंधन बनाने पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अक्टूबर को गुजरात के बनासकांठा जिले में बनास डेयरी की तीन परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इसी कार्यक्रम के दौरान थराद और राधनपुर में गोबर आधारित दो बायो-CNG संयंत्रों का शिलान्यास भी प्रस्तावित है। इन पहलों से पशु नस्ल सुधार, डेयरी उत्पादों के भंडारण, खाद्य प्रसंस्करण और गोबर के उपयोग को बढ़ावा देने की योजना है।
तीन परियोजनाओं पर ₹407.56 करोड़ का निवेश
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, भिलडी में भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (BBBRC) लगभग ₹324.77 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। 127 एकड़ में फैले इस केंद्र का उद्देश्य देशी गायों और भैंसों की आनुवंशिक गुणवत्ता सुधारने के लिए आधुनिक प्रजनन तकनीकों और अनुसंधान को बढ़ावा देना है। केंद्र में सालाना 25,000 उच्च गुणवत्ता वाले भ्रूण तैयार करने का लक्ष्य बताया गया है। वास्तविक लाभ पशु प्रबंधन, उपलब्ध तकनीक और उसके उपयोग पर निर्भर करेगा।
सानादर में फ्रेंच फ्राइज प्रसंस्करण संयंत्र की लागत लगभग ₹51.65 करोड़ है। इससे आलू के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिल सकता है। पालनपुर में ₹31.14 करोड़ की लागत से डेयरी उत्पादों के लिए स्वचालित भंडारण और निकासी प्रणाली तैयार की गई है। इन तीन परियोजनाओं की संयुक्त लागत ₹407.56 करोड़ बताई गई है।
दो नए बायो-CNG संयंत्रों की तैयारी
प्रस्तावित थराद संयंत्र प्रतिदिन 75 मीट्रिक टन और राधनपुर संयंत्र 100 मीट्रिक टन गोबर के प्रसंस्करण की क्षमता वाला होगा। दोनों की कुल प्रस्तावित क्षमता 175 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। गोबर से बायो-CNG और जैविक खाद तैयार करने से अपशिष्ट के उपयोग तथा स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है।
किसानों और पशुपालकों के लिए क्या जरूरी है?
इन परियोजनाओं से संभावित लाभ में बेहतर पशु नस्लों तक पहुंच, आलू के लिए प्रसंस्करण अवसर और गोबर के उपयोग से अतिरिक्त आय की संभावना शामिल है। हालांकि, हर किसान या पशुपालक को स्वतः लाभ या निश्चित आय मिलने की गारंटी नहीं है। गोबर की खरीद, भुगतान, प्रसंस्करण इकाइयों से जुड़ने और उत्पाद बेचने की शर्तें स्थानीय स्तर पर संबंधित सहकारी संस्था से पता करनी चाहिए।



