केंद्र सरकार ने निर्धारित टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की समय-सीमा 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 19 अक्टूबर 2026 को अधिसूचना जारी की, जो 22 अक्टूबर को प्रकाशित हुई। आयात की अधिकतम मात्रा 10 लाख मीट्रिक टन ही है और पहले से लागू अन्य शर्तें भी बरकरार हैं।
इथेनॉल नीति में क्या बदलाव हुआ?
2026-27 के इथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए तेल विपणन कंपनियों की नई खरीद प्रक्रिया में गन्ने के रस, गन्ना सिरप और B-Heavy शीरे से बने इथेनॉल की आपूर्ति शामिल नहीं की गई है। इसका उद्देश्य चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के प्रयासों से जुड़ा है। हालांकि, इसे सभी प्रकार के इथेनॉल उत्पादन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं समझना चाहिए। C-Heavy शीरे, मक्का और निर्धारित अन्य स्रोतों से बने इथेनॉल के विकल्प उपलब्ध हैं।
गन्ना किसानों पर क्या असर पड़ सकता है?
कच्ची चीनी के आयात की समय-सीमा बढ़ने से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता और कारोबार प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, इथेनॉल खरीद नीति में बदलाव से चीनी मिलों और डिस्टिलरी की उत्पादन योजनाओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इन फैसलों से गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (SAP), भुगतान या किसानों की आय में तत्काल बदलाव होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। वास्तविक असर उत्पादन, बाजार की मांग और आगे के सरकारी फैसलों पर निर्भर करेगा।
किसानों को क्या करना चाहिए?
गन्ना किसान अपनी संबंधित चीनी मिल से पेराई सत्र, गन्ना आपूर्ति पर्ची और भुगतान की जानकारी लेते रहें। गन्ना मूल्य में बदलाव या भुगतान की नई समय-सीमा संबंधी खबरों की पुष्टि सरकारी आदेश से करें। केवल चीनी आयात या इथेनॉल नीति में बदलाव के आधार पर खेती और बिक्री से जुड़ा आर्थिक निर्णय न लें।



