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Farmer ID क्या है और किसानों के लिए क्यों जरूरी है? ऐसे बनाएं किसान आईडी

कृषि क्षेत्र में सरकारी सेवाओं को डिजिटल बनाने के लिए AgriStack के तहत Farmer Registry तैयार की जा रही है। इसके माध्यम से किसान को एक डिजिटल पहचान यानी Farmer ID (किसान आईडी) दी जाती है। यह पहचान किसान की भूमि, फसल और कृषि से जुड़ी दूसरी जानकारी को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने में मदद करती है। मार्च 2026 तक देश में 9.20 करोड़ से अधिक Farmer ID बनाई जा चुकी थीं, जिनमें उत्तर प्रदेश की करीब 1.99 करोड़ Farmer ID शामिल थीं।

किसान आईडी क्यों जरूरी है?

Farmer ID का उद्देश्य किसान को अलग-अलग कृषि सेवाओं और योजनाओं तक डिजिटल तरीके से पहुंच आसान बनाना है। सरकारी जानकारी के अनुसार इसका उपयोग PM-KISAN, फसल बीमा, MSP आधारित खरीद, कृषि ऋण, कृषि इनपुट और आपदा राहत जैसी सेवाओं के साथ डिजिटल एकीकरण में किया जा सकता है।

हालांकि Farmer ID बन जाने का मतलब यह नहीं है कि किसान हर सरकारी योजना के लिए अपने-आप पात्र हो जाएगा। हर योजना की अपनी पात्रता और नियम होते हैं।

उत्तर प्रदेश में Farmer ID कैसे बनाएं?

उत्तर प्रदेश के किसान Farmer Registry के Self Mode से पंजीकरण कर सकते हैं। सरकारी User Manual के अनुसार प्रक्रिया इस प्रकार है:

1. Farmer Registry पोर्टल खोलें
उत्तर प्रदेश Farmer Registry के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं और Sign Up विकल्प चुनें।

2. आधार नंबर दर्ज करें
किसान का आधार नंबर दर्ज करके Submit करें।

3. आधार OTP से सत्यापन करें
आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए OTP को दर्ज करके सत्यापन पूरा करें।

4. मोबाइल नंबर सत्यापित करें
अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और OTP के माध्यम से उसे Verify करें।

5. पासवर्ड बनाएं
पंजीकरण खाते के लिए पासवर्ड बनाएं और फिर मोबाइल नंबर तथा पासवर्ड से Login करें।

6. “Register as Farmer” चुनें
Login के बाद Farmer Registration शुरू करें। किसान की व्यक्तिगत जानकारी, फोटो और आवासीय विवरण की जांच/प्रविष्टि करें। यदि पता सही तरीके से प्राप्त नहीं हुआ है तो पोर्टल पर उपलब्ध विकल्प से नवीन आवासीय विवरण दर्ज किया जा सकता है।

7. जमीन की जानकारी जोड़ें
Farmer Registry में किसान की भूमि का विवरण महत्वपूर्ण है। पोर्टल में Fetch Land Details विकल्प के माध्यम से भूमि की जानकारी प्राप्त करने का विकल्प दिया गया है। जरूरत पड़ने पर गांव और सर्वे नंबर दर्ज करके भूमि विवरण जोड़ा जा सकता है।

8. सभी जमीनों को Verify करें
अपनी भूमि की जानकारी देखकर सही जमीन का चयन करें और Verify All Lands विकल्प से सत्यापन करें। भूमि और आधार में नाम के मिलान के आधार पर सिस्टम द्वारा Match Score भी बनाया जाता है।

9. सहमति और घोषणा पूरी करें
दिए गए Consent और Declaration विकल्पों को पढ़कर आवश्यक बॉक्स चुनें और Submit करें।

10. e-Sign और Aadhaar OTP पूरा करें
इसके बाद Farmer eSign की प्रक्रिया में जाकर Aadhaar आधारित OTP से प्रमाणीकरण पूरा करें। सफल सत्यापन के बाद किसान का पंजीकरण पूरा हो जाता है।

जमीन का नाम नहीं दिख रहा तो क्या करें?

कई किसानों के सामने भूमि रिकॉर्ड में नाम, सर्वे नंबर या दूसरी जानकारी से जुड़ी समस्या आ सकती है। ऐसी स्थिति में पोर्टल के अनुसार किसान Update My Information में जाकर अन्य भूमि जोड़ सकता है। इसमें गांव, सर्वे नंबर आदि की जानकारी देकर भूमि रिकॉर्ड से विवरण प्राप्त करने का विकल्प है। यदि मालिकों की सूची में किसान का नाम नहीं है, तो पोर्टल में “My name is not there in the list of owners” विकल्प भी दिया गया है।

इसलिए Farmer ID बनाते समय किसान को अपनी भूमि की खतौनी/राजस्व रिकॉर्ड की जानकारी, आधार और मोबाइल नंबर में किसी भी गलती को पहले जांच लेना चाहिए।

मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं है तो?

उत्तर प्रदेश की आधिकारिक User Manual के अनुसार Aadhaar OTP नहीं मिलने का एक कारण आधार से मोबाइल नंबर का लिंक न होना हो सकता है। ऐसी स्थिति में पहले आधार में मोबाइल नंबर अपडेट कराने की जरूरत पड़ सकती है।

Farmer ID बनने के बाद क्या फायदा होगा?

Farmer ID एक डिजिटल पहचान के रूप में काम करेगी और भविष्य में अलग-अलग कृषि सेवाओं के साथ किसान की पहचान और रिकॉर्ड को जोड़ने में मदद करेगी। सरकार के अनुसार इससे योजनाओं का DBT, फसल बीमा, MSP खरीद, कृषि ऋण, कृषि इनपुट वितरण और आपदा राहत जैसी सेवाओं के डिजिटल एकीकरण को आसान बनाया जा सकता है।

किसान के लिए इसका एक बड़ा फायदा यह है कि बार-बार अलग-अलग सेवाओं के लिए वही जानकारी देने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि किसी योजना का लाभ पाने के लिए संबंधित योजना की अलग पात्रता पूरी करनी होगी।

किसान खुद नहीं बना पा रहा है तो क्या करें?

हर किसान के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा होना जरूरी नहीं है। केंद्र सरकार के अनुसार ऐसे किसानों की मदद के लिए CSC, FPO, KrishiSakhi और अन्य सहायता केंद्रों का उपयोग किया जा सकता है। राज्यों द्वारा Farmer ID बनाने के लिए शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं।

⚠️ किसान इन बातों का रखें ध्यान
Farmer ID बनाने के लिए केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल/CSC का इस्तेमाल करें।
OTP, Aadhaar PIN या बैंक की गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें।
पंजीकरण के बाद अपना आवेदन/स्थिति जरूर जांचें।
जमीन का नाम, सर्वे नंबर और क्षेत्रफल सही है या नहीं, ध्यान से देखें।
जमीन का रिकॉर्ड गलत होने पर पहले संबंधित राजस्व विभाग/लेखपाल स्तर पर सुधार की प्रक्रिया समझें।
Farmer ID बनने को किसी सरकारी योजना में स्वतः स्वीकृति न समझें।

निष्कर्ष: Farmer ID कृषि सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण व्यवस्था है। किसान को अभी से अपनी आधार, मोबाइल और भूमि संबंधी जानकारी सही रखनी चाहिए। इससे भविष्य में डिजिटल कृषि सेवाओं और विभिन्न सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान बनाने में मदद मिल सकती है।

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